दुर्ग/नई दिल्ली,
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अफ्रीकन स्वाइन फीवर (एएसएफ) का गंभीर प्रकोप सामने आया है। जिले के मुडपार स्थित एक सूअर पालन फार्म में इस खतरनाक वायरस के चलते 300 से अधिक सफेद सूअरों की मौत हो गई है। मामले की पुष्टि भोपाल स्थित हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज लैब की रिपोर्ट में हुई है, जिसके बाद प्रशासन और पशु चिकित्सा विभाग में हड़कंप मच गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, फार्म में सूअरों की अचानक मौत का सिलसिला अप्रैल की शुरुआत से तेज हो गया था। फार्म संचालक पीओ जाय ने बताया कि 29 मार्च को पहला सैंपल जांच के लिए भेजा गया था। रिपोर्ट आने के बाद यह साफ हो गया कि सूअर अफ्रीकन स्वाइन फीवर से संक्रमित थे, जो बेहद संक्रामक और घातक बीमारी मानी जाती है।
रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन और पशु चिकित्सा विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए संक्रमित सूअरों को खत्म करने का निर्णय लिया। अधिकारियों की मौजूदगी में 83 संक्रमित सूअरों को इंजेक्शन देकर मार दिया गया, ताकि संक्रमण को और फैलने से रोका जा सके। विभाग ने आसपास के क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ा दी है और निगरानी तेज कर दी गई है।
फार्म संचालक के मुताबिक, इस बीमारी के कारण उन्हें एक करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ है। बड़ी संख्या में सूअरों की मौत से न केवल उनका व्यवसाय प्रभावित हुआ है, बल्कि स्थानीय स्तर पर पशुपालन से जुड़े लोगों में भी डर का माहौल बन गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अफ्रीकन स्वाइन फीवर केवल सूअरों में फैलने वाला वायरस है और यह मनुष्यों को संक्रमित नहीं करता। हालांकि, इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अब तक इस बीमारी का कोई प्रभावी इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में संक्रमण फैलने पर संक्रमित पशुओं को मारना ही एकमात्र विकल्प रह जाता है।
प्रशासन ने क्षेत्र के अन्य सूअर पालकों को सतर्क रहने, साफ-सफाई बनाए रखने और किसी भी संदिग्ध लक्षण की तुरंत सूचना देने की अपील की है। साथ ही, पशुओं के आवागमन पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि संक्रमण को सीमित किया जा सके।
इस घटना ने एक बार फिर पशुपालन क्षेत्र में जैव-सुरक्षा (बायो सिक्योरिटी) उपायों की आवश्यकता को रेखांकित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो यह बीमारी अन्य क्षेत्रों में भी तेजी से फैल सकती है।

