ब्रिटेन की राजनीति में एक नया मोड़ आया है. शुक्रवार को ग्रीन पार्टी ने संसद की एक सीट पर उपचुनाव जीतकर सबको चौंका दिया है। यह जीत ब्रिटेन में छोटी पार्टियों के सफलता दिखाई है, जबकि प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की लेबर पार्टी के लिए यह करारा झटका साबित हो रही है। लेबर पार्टी यहां तीसरे स्थान पर खिसक गई.

उपचुनाव के नतीजे

ग्रीन पार्टी की प्रत्याशी हन्ना स्पेंसर ने गार्टन और डेंटन सीट पर जीत साहिल की, जहां उन्हें 14,980 वोट मिले। रिफॉर्म यूके के मैथ्यू गुडविन को 10,578 वोट और लेबर की एंजेलिकी स्टोगीया को 9,364 वोट हासिल हुए। यह क्षेत्र दशकों से लेबर का गढ़ रहा है, लेकिन 2024 में स्टारमर की सत्ता के बाद सरकार की छवि में गिरावट आई है।

दो-पार्टी व्यवस्था का अंत?

ब्रिटेन की राजनीति अब दो-पार्टी सिस्टम से चार-पार्टी की ओर बढ़ रही है। ग्रीन और रिफॉर्म का उदय एक बहु-दलीय माहौल का संकेत देता है। बड़ी पार्टियां अब अपनी वैचारिक जमीन पर बिना चुनौती के काबिज नहीं रह सकतीं। विद्रोही दल अधिक तीखी विचारधारा के साथ चुनौती दे रहे हैं।

परंपरागत व्यवस्था में लेबर प्रगतिशील वोट खोने का जोखिम उठा सकती थी, क्योंकि कंजर्वेटिव ही एकमात्र विकल्प था। लेकिन अब यह तर्क टूट रहा है। मतदाता अब सोच-समझकर वोट देते हैं, प्रगतिशील लेबर के पीछे एकजुट नहीं होते, और दक्षिणपंथी कंजर्वेटिव के साथ नहीं हैं। यह बिखराव दोनों दलों के प्रभुत्व को कमजोर कर रहा है।

दोनों दलों की रणनीतिक चुनौतियां

लेबर और कंजर्वेटिव समान दुविधा में हैं। लेबर पार्टी अगर लेफ्ट की ओर जाती है तो मध्यमार्गी खिसक सकते हैं, जबकि केंद्र में रहने से ग्रीन मजबूत होंगे। कंजर्वेटिव भी राईट विंग की ओर जाने से मॉडरेट खो सकते हैं। यह दबाव शासक दलों को कई मोर्चों पर लड़ने को मजबूर करता है।