मध्य पूर्व में जारी तनाव अब और अधिक खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। Donald Trump द्वारा दी गई सख्त डेडलाइन के बीच Masoud Pezeshkian ने बड़ा बयान देते हुए दावा किया है कि 1.4 करोड़ से ज्यादा ईरानी देश की रक्षा के लिए अपनी जान देने को तैयार हैं। इस बयान ने वैश्विक स्तर पर चिंता और बढ़ा दी है।
मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए राष्ट्रपति पेजेशकियान ने कहा कि ईरान की संप्रभुता की रक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए देश का हर नागरिक तैयार है। उन्होंने लिखा, “मैं खुद भी ईरान के लिए अपनी जान कुर्बान करने को तैयार हूं।” यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच टकराव चरम पर है।
ट्रंप का सख्त अल्टीमेटम
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने Strait of Hormuz को लेकर ईरान को अंतिम चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर मंगलवार रात 8 बजे तक होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला गया, तो अमेरिका बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करेगा। ट्रंप ने यहां तक दावा किया कि ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को महज चार घंटे में पूरी तरह तबाह किया जा सकता है।
व्हाइट हाउस में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान ट्रंप ने कहा, “अगर हमारी शर्तें नहीं मानी गईं तो ईरान को पाषाण युग में पहुंचा दिया जाएगा।” उनके इस बयान ने हालात को और विस्फोटक बना दिया है।
ईरान में बढ़ी तैयारियां
ईरान में संभावित हमले को देखते हुए सरकार और जनता दोनों स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। देश के उप खेल मंत्री अलीरेजा रहीमी ने एथलीटों, कलाकारों, छात्रों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे महत्वपूर्ण बिजली संयंत्रों के आसपास मानव श्रृंखला बनाकर सुरक्षा में सहयोग करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम प्रतीकात्मक होने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकता है।
क्या बढ़ेगा युद्ध का खतरा?
मिडिल ईस्ट में जारी यह संकट अब 39वें दिन में प्रवेश कर चुका है और हर गुजरते दिन के साथ हालात और गंभीर होते जा रहे हैं। Iran और United States के बीच सीधा टकराव वैश्विक अर्थव्यवस्था, खासकर तेल आपूर्ति पर बड़ा असर डाल सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य टकराव पूरी दुनिया के लिए आर्थिक और रणनीतिक संकट पैदा कर सकता है।
निष्कर्ष
ईरान के सख्त रुख और अमेरिका की आक्रामक चेतावनी के बीच हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। आने वाले कुछ घंटे यह तय करेंगे कि यह टकराव बातचीत से सुलझेगा या फिर मिडिल ईस्ट एक बड़े युद्ध की ओर बढ़ेगा।

