2026 की शुरुआत तक, इंडियन रेलवे देश भर में 7300 से अधिक रेलवे स्टेशनों का विशाल नेटवर्क ऑपरेट करता है। ये स्टेशन करोड़ों यात्रियों और माल ढुलाई के लिए डेली सेवाएं देते हैं। इस संख्या में आधिकारिक, एक्टिव और छोटे ‘हॉल्ट’ स्टेशन सभी शामिल हैं। पश्चिम बंगाल में मौजूद हावड़ा जंक्शन भारत का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन (Largest Railway Station in India) है। मगर क्या आप दुनिया के सबसे बड़े रेलवे स्टेशन (Largest Railway Station in the World) के बारे में जानते हैं? अगर नहीं, तो आइए हम बताते हैं।

ये है दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन

दुनिया का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन चीन का ‘चोंगकिंग ईस्ट स्टेशन’ (Chongqing East Station) है। ये इतना विशाल है कि इसके अंदर 170 फुटबॉल के मैदान समा सकते हैं। इसमें न्यूयॉर्क के पाँच ‘ग्रैंड सेंट्रल टर्मिनल’ भी आसानी से फिट हो सकते हैं। असल में चोंगकिंग ईस्ट स्टेशन से पहले, साइज के मामले में सबसे बड़े स्टेशन का ताज न्यूयॉर्क के ‘ग्रैंड सेंट्रल टर्मिनल’ के पास ही था, लेकिन अब यह खिताब ‘चोंगकिंग ईस्ट स्टेशन’ ने अपने नाम कर लिया है।

कितना है चोंगकिंग ईस्ट स्टेशन का साइज?

चीन के चोंगकिंग सिटी में मौजूद चोंगकिंग ईस्ट स्टेशन 1.22 मिलियन वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह स्टेशन न केवल अपने विशाल आकार के कारण फेमस है, बल्कि इसमें 3 यार्ड, 15 प्लेटफॉर्म और 29 रेलवे ट्रैक भी हैं। दूसरी अहम बात कि ये चार मंजिला स्टेशन है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अपने सबसे बिजी समय में, यह स्टेशन हर घंटे 16,000 यात्रियों को संभालने में सक्षम है।

सबसे महत्वपूर्ण हाई-स्पीड रेलवे स्टेशनों में से एक

चोंगकिंग ईस्ट स्टेशन चीन के सबसे महत्वपूर्ण हाई-स्पीड रेलवे स्टेशनों में से एक है। इस स्टेशन पर कई शानदार सुविधाएँ हैं, जो किसी भी कमर्शियल एयरपोर्ट को टक्कर दे सकती हैं। यहाँ डिजिटल बोर्ड, विभिन्न भाषाओं में मदद करने वाली सर्विसेज और तेज रफ्तार वाला Wi-Fi मिलता है।
साथ ही चार्जिंग पॉइंट, सेफ लॉकर और व्हीलचेयर की सुविधा भी दी जाती है।

कितने में बना और किसने बनाया?

चोंगकिंग ईस्ट रेलवे स्टेशन, जो दुनिया के सबसे बड़े हाई-स्पीड रेल हब में से एक है, का निर्माण चाइना रेलवे कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन (CRCC) द्वारा किया गया। इसका ऑपरेशन चाइना रेलवे चेंगदू ग्रुप द्वारा किया जाता है। ये दक्षिण-पश्चिम चीन में एक मेजर ट्रांसपोर्टेशन हब के रूप में काम करता है।
बता दें कि इसका निर्माण कार्य साल 2025 में पूरा हुआ था। इसे बनाने की लागत कई रिपोर्ट्स के अनुसार करीब 65000 करोड़ रुपये आई थी।