रायपुर/नई दिल्ली:
ऑनलाइन सट्टेबाजी के चर्चित ‘महादेव सट्टा एप’ ने एक बार फिर नए रूप में वापसी कर ली है। जांच एजेंसियों से बचने के लिए इसके संचालकों ने नाम की स्पेलिंग में मामूली बदलाव करते हुए ‘Mahadev’ की जगह ‘Mahaadev’ कर दिया है, लेकिन ठगी और अवैध सट्टेबाजी का खेल पहले जैसा ही जारी है।
सूत्रों के मुताबिक, इस एप के जरिए इन दिनों आईपीएल मैचों और पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों पर जमकर सट्टा लगाया जा रहा है। सट्टेबाजी का दायरा सिर्फ मैच के नतीजों तक सीमित नहीं है, बल्कि ओवर में बनने वाले रन, विकेट गिरने और अन्य सूक्ष्म घटनाओं तक फैल चुका है। वहीं चुनावी सट्टे में विभिन्न दलों की संभावित सीटों और जीत-हार के अनुमान पर दांव लगाए जा रहे हैं।
ED की कार्रवाई के बावजूद फिर सक्रिय नेटवर्क
गौरतलब है कि वर्ष 2023 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने करीब 6,000 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में इस एप के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी। इसके बावजूद, सट्टा सिंडिकेट ने तकनीकी और नाम में बदलाव कर दोबारा अपनी गतिविधियां शुरू कर दी हैं।
दुबई से संचालन, भारत में फैला जाल
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का संचालन कथित तौर पर छत्तीसगढ़ के भिलाई निवासी सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल कर रहे हैं, जो पिछले दो वर्षों से फरार हैं। इन दोनों के दुबई से पूरे नेटवर्क को संचालित करने की जानकारी सामने आई है।
छोटे दांव से बड़ी ठगी तक का खेल
इस एप के जरिए आम लोगों को 100 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक के छोटे-छोटे दांव लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है। लेकिन धीरे-धीरे यह रकम बढ़ती जाती है और यूजर्स भारी आर्थिक नुकसान का शिकार हो जाते हैं।
पुलिस की कार्रवाई जारी
एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट, रायपुर ने वर्ष 2026 में अब तक ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े तीन मामलों में 14 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान करीब 1.04 करोड़ रुपये नकद, लैपटॉप, मोबाइल, वाहन और बैंकिंग दस्तावेज समेत कुल 1.92 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है।
इसके अलावा, रायपुर में एक जुए के अड्डे पर हाल ही में पुलिस ने दबिश देकर 6.34 लाख रुपये नकद, एक लग्जरी कार (मर्सिडीज) और दो आईफोन बरामद किए हैं। इस मामले में राहुल सिंह और रितेश कुमार आनंद को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।
चुनौती बनी डिजिटल सट्टेबाजी
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी के ऐसे नेटवर्क लगातार तकनीकी बदलाव और पहचान छुपाने के नए तरीके अपनाकर कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं।
फिलहाल, एजेंसियां इस नए अवतार में सक्रिय ‘महादेव सट्टा एप’ के खिलाफ सबूत जुटाने और नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के प्रयास में जुटी हैं।

