छत्तीसगढ़ के 5,000 से अधिक सरकारी स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय न होने पर बिलासपुर हाई कोर्ट ने गहरी चिंता जताई है। कोर्ट ने इसे ‘शर्मनाक’ बताते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
HighLights
- 5000+ सरकारी स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय नहीं
- बिलासपुर हाई कोर्ट ने स्थिति को ‘शर्मनाक’ बताया
- स्कूल शिक्षा सचिव से विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश
छत्तीसगढ़ के 5,000 से अधिक सरकारी स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय नहीं होने को बिलासपुर हाई कोर्ट ने शर्मनाक बताया है। हाई कोर्ट ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद सुधार की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को शपथ पत्र के साथ विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
जनहित याचिका की अगली सुनवाई 23 मार्च 2026 को होगी। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने जनवरी 2025 में दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान एक समाचार रिपोर्ट का उल्लेख किया, जिसमें विद्यालयों में लड़कियों के शौचालयों की गंभीर कमी और खराब स्थिति का उल्लेख था। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 5000 से अधिक विद्यालयों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय नहीं हैं, जबकि 8,000 से अधिक विद्यालयों में शौचालयों की स्थिति अत्यंत खराब है।
केंद्र की रिपोर्ट भयावह और चिंता
जनकडिवीजन बेंच ने कहा कि ऐसी स्थितियों के कारण छात्राओं और शिक्षकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और मूत्र संक्रमण की घटनाएं बढ़ रही हैं। बिलासपुर जिले में 160 से अधिक स्कूलों में शौचालयों से संबंधित गंभीर समस्याएं हैं, जबकि 200 से अधिक स्कूलों में शौचालय अनुपयोगी हैं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि लड़कियों के लिए अलग और कार्यात्मक शौचालयों की अनुपस्थिति स्कूल छोड़ने की दर में वृद्धि का कारण बन सकती है, जिसे प्रणालीगत विफलता के रूप में देखा गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली (यू-डीआइएसई) वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 56,615 स्कूलों में से केवल 52,545 स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय क्रियाशील हैं। बता दें कि राज्य के सरकारी स्कूलों में लगभग 19.54 लाख छात्राएं नामांकित हैं।
अन्य राज्यों की स्थिति
जम्मू-कश्मीर के 17,403 सरकारी स्कूलों में (92.29 प्रतिशत) में छात्राओं के लिए अलग शौचालय की सुविधा उपलब्ध है। 1,321 स्कूल (7.71 प्रतिशत) अभी इस सुविधा से वंचित हैं। 265 स्कूलों में छात्राओं के लिए शौचालयों का निर्माण किया जा रहा है। -उत्तराखंड के 1,385 राजकीय इंटर कालेज व 830 माध्यमिक विद्यालयों में छात्राओं के शत प्रतिशत शौचालय की सुविधा मिलने लगी है।
जबकि, 13,639 प्राथमिक विद्यालयों में से 141 विद्यालयों में छात्राओं के लिए शौचालय नहीं हैं। जिनके लिए बजट जारी कर दिया गया है।-राजस्थान के 14 हजार से अधिक स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग से शौचालय नहीं है। इनमें करीब नौ हजार सरकारी व पांच हजार निजी अथवा सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल हैं। राज्य में सरकारी स्कूलों की संख्या 66 से 68 हजार के मध्य है। वहीं कुल स्कूलों की संख्या एक लाख छह हजार से अघिक है।

