

समूह की महिलाओं ने बताया कि पारंपरिक विधि से तैयार प्राकृतिक गुलाल की मांग लगातार बढ़ रही है। पिछले वर्ष समूह ने लगभग 30 हजार रुपये से अधिक की बिक्री कर 10 हजार रुपये से ज्यादा का शुद्ध लाभ अर्जित किया था। इस वर्ष मांग को देखते हुए समय से पहले उत्पादन शुरू कर दिया गया है।
इस पहल की सराहना जिला प्रशासन ने भी की है। कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने महिलाओं के प्रयासों को सराहनीय बताते हुए कहा कि ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं और समाज में अपनी अलग पहचान स्थापित कर रही हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच यह पहल आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की दिशा में सकारात्मक कदम मानी जा रही है। प्राकृतिक गुलाल न केवल स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रहा है।
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