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Friday, April 10, 2026

मिडिल ईस्ट तनाव का असर: चीन में 15 दिन में दूसरी बार महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, सप्लाई संकट के डर से तैयार ‘प्लान-B’

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CG City News

बीजिंग:
वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ता दिख रहा है। चीन में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में महज 15 दिनों के भीतर दूसरी बार बढ़ोतरी की गई है। इस फैसले के पीछे मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को मुख्य कारण बताया जा रहा है।

चीन की शीर्ष आर्थिक संस्था, नेशनल डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म कमीशन (NDRC) ने बुधवार से नई कीमतें लागू करने का ऐलान किया है। इसके तहत पेट्रोल की कीमत में 420 युआन प्रति टन और डीजल में 400 युआन प्रति टन की बढ़ोतरी की गई है। भारतीय मुद्रा में यह बढ़ोतरी क्रमशः करीब 5,600 रुपये और 5,300 रुपये प्रति टन के आसपास बैठती है।

15 दिन में दूसरी बार बढ़े दाम

इससे पहले 23 मार्च को भी चीन ने ईंधन की कीमतों में इजाफा किया था। लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और बढ़ती अनिश्चितता को देखते हुए सरकार को दोबारा कीमतें बढ़ानी पड़ीं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने तेल बाजार को अस्थिर कर दिया है, जिससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

सप्लाई चेन पर खतरे की आशंका

चीन को सबसे बड़ा डर तेल आपूर्ति में बाधा का है। खासतौर पर ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ जैसे अहम मार्ग पर संकट गहराने से सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि सरकार ने देश की प्रमुख तेल कंपनियों—चाइना नेशनल पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और चाइना पेट्रोकेमिकल—को उत्पादन बनाए रखने और सप्लाई नेटवर्क को मजबूत रखने के निर्देश दिए हैं।

साथ ही, सरकार ने कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त निगरानी के आदेश दिए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

चीन की ‘प्लान-B’ रणनीति

ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चीन पहले से सतर्क नजर आ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, चीन के पास लगभग चार महीने का इमरजेंसी कच्चा तेल भंडार मौजूद है, जो किसी भी आपात स्थिति में राहत दे सकता है। इसके अलावा, रूस के साथ दीर्घकालिक ऊर्जा समझौते और गैस पाइपलाइन के जरिए सीधी सप्लाई भी चीन के लिए बड़ी ताकत मानी जा रही है।

आयात पर निर्भरता बनी चुनौती

हालांकि, चीन अपनी जरूरत का करीब 70% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से लगभग 30% सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है। ऐसे में यदि मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़ते हैं, तो चीन के सामने ऊर्जा संकट गहराने का खतरा बना रहेगा।

फिलहाल, चीन की सरकार कीमतों को नियंत्रित करने और सप्लाई बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठा रही है, लेकिन वैश्विक हालात में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में आम जनता पर महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।


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