मुंबई
टीवी और फिल्मों की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुकीं उल्का गुप्ता ने हाल ही में अपने अभिनय करियर, बचपन के अनुभव और पारिवारिक प्रभाव को लेकर खुलकर बात की। ‘झांसी की रानी’ से घर-घर में पहचान बनाने वाली उल्का ने बताया कि कैसे उन्होंने सैकड़ों लड़कियों को पीछे छोड़कर यह प्रतिष्ठित भूमिका हासिल की थी और किस तरह उनके पिता ने बचपन से ही उन्हें अभिनय के लिए तैयार किया।
पिता से मिली अभिनय की प्रेरणा
उल्का गुप्ता ने बताया कि अभिनय उनके लिए सिर्फ एक पेशा नहीं बल्कि एक विरासत है। उनके पिता गगन गुप्ता खुद एक अभिनेता हैं, जिन्होंने कम उम्र में ही मुंबई आकर अपने सपनों को साकार करने की कोशिश की। उल्का के अनुसार, “मैं एक कलाकार के घर में पैदा हुई हूं, इसलिए अभिनय मेरे खून में है।”
उन्होंने बताया कि उनके पिता घर पर ही थिएटर जैसी ट्रेनिंग देते थे। कभी कविता सुनाने को कहते, तो कभी ऐतिहासिक किरदारों के संवाद बोलने को। यहां तक कि मेहमानों के सामने भी बच्चों से अभिनय करवाया जाता था। उल्का ने हंसते हुए कहा कि उस समय वह अपने पिता की “कठपुतली” बन जाती थीं, लेकिन आज समझ आता है कि वही उनकी सबसे बड़ी ट्रेनिंग थी।
6 साल की उम्र से शुरू हुआ सफर
उल्का ने बताया कि उन्होंने मात्र 6 साल की उम्र में ऑडिशन देना शुरू कर दिया था। शुरुआती दिनों में छोटे-छोटे रोल मिले, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। टीवी शो ‘सात फेरे’ में सलोनी की बेटी का किरदार उनके करियर का अहम मोड़ साबित हुआ।
उन्होंने कहा कि उस शो की कहानी ने उन्हें बहुत प्रेरित किया, क्योंकि उसमें रंगभेद जैसे मुद्दे को उठाया गया था। यह उनके लिए सिर्फ अभिनय नहीं बल्कि एक सीख भी थी।
‘झांसी की रानी’ के लिए कड़ा मुकाबला
उल्का गुप्ता ने बताया कि ‘झांसी की रानी’ में लक्ष्मीबाई का किरदार पाने के लिए उन्हें कड़ी प्रतिस्पर्धा से गुजरना पड़ा। “करीब 200-300 लड़कियों में से मेरा चयन हुआ था। उस समय यह मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी,” उन्होंने कहा।
इस भूमिका ने उन्हें टीवी इंडस्ट्री में एक अलग पहचान दिलाई और वह बाल कलाकार से एक मजबूत अभिनेत्री के रूप में उभरीं।
बड़े सितारों के बीच बचपन
उल्का ने अपने बचपन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के बड़े सितारों के बीच रहने का मौका मिला। उनके पिता की दोस्ती शाहरुख खान से है, जिसके चलते वह बचपन से ही फिल्म प्रीमियर और इंडस्ट्री इवेंट्स में जाती रही हैं।
उन्होंने कहा कि वहां काजोल और रानी मुखर्जी जैसे कलाकारों को करीब से देखने का मौका मिला, जिससे उन्हें इंडस्ट्री को समझने में मदद मिली।
अमिताभ बच्चन के साथ खास फैन मोमेंट
हालांकि उल्का ने कई बड़े सितारों के साथ समय बिताया, लेकिन अमिताभ बच्चन के साथ उनका अनुभव सबसे खास रहा। उन्होंने बताया कि जब उन्हें पता चला कि अमिताभ फिल्मिस्तान में शूट कर रहे हैं, तो वह खुद उनसे मिलने पहुंच गईं। यह उनके लिए एक यादगार फैन मोमेंट था।
दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी सक्रिय
उल्का गुप्ता अब सिर्फ हिंदी तक सीमित नहीं हैं। वह तेलुगु, बंगाली और मराठी फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि अलग-अलग भाषाओं में काम करने का अनुभव उन्हें एक बेहतर कलाकार बना रहा है।
वह अनुष्का शेट्टी को अपनी पसंदीदा अभिनेत्री मानती हैं और उनके साथ काम करने का अनुभव भी साझा किया।
अपकमिंग फिल्म और भूमिका चावला के साथ काम
उल्का ने अपनी आगामी तेलुगु फिल्म के बारे में भी जानकारी दी, जिसमें वह भूमिका चावला के साथ नजर आएंगी। उन्होंने बताया कि भूमिका से उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है, खासकर किताबों और अभिनय की समझ के मामले में।
उल्का ने कहा कि सेट पर वे मोबाइल फोन से दूर रहते हैं और खाली समय में बातचीत और सीखने में बिताते हैं।
निष्कर्ष
उल्का गुप्ता की कहानी सिर्फ एक अभिनेत्री की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, अनुशासन और पारिवारिक समर्थन का उदाहरण भी है। बचपन में पिता की “कठपुतली” बनने से लेकर ‘झांसी की रानी’ जैसी ऐतिहासिक भूमिका निभाने तक का उनका सफर प्रेरणादायक है। आज वह भारतीय सिनेमा के विभिन्न भाषाई क्षेत्रों में अपनी पहचान मजबूत कर रही हैं और आने वाले समय में उनसे और भी दमदार प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।

