मुंबई:
वेणु श्रीनिवासन ने ‘बाई हीराबाई चैरिटेबल ट्रस्ट’ से इस्तीफा देकर कॉर्पोरेट और परोपकारी जगत में हलचल पैदा कर दी है। आधिकारिक तौर पर उन्होंने अपने इस्तीफे की वजह बढ़ती व्यावसायिक जिम्मेदारियों और समय की कमी को बताया है, लेकिन यह फैसला ऐसे समय में आया है जब उनके ट्रस्टी पद को लेकर कानूनी विवाद गहराता जा रहा है।
श्रीनिवासन, जो TVS Motor Company के चेयरमैन एमेरिटस हैं और Tata Trusts के सात प्रमुख ट्रस्टों के वाइस चेयरमैन भी रह चुके हैं, ने शनिवार को यह इस्तीफा दिया। उनके इस कदम को मौजूदा विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उनकी और एक अन्य ट्रस्टी की योग्यता पर सवाल उठाए गए हैं।
कानूनी चुनौती ने बढ़ाया दबाव
इस पूरे मामले की शुरुआत पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री द्वारा दायर एक आपत्ति-आवेदन से हुई है। उन्होंने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि श्रीनिवासन और एक अन्य ट्रस्टी विजय सिंह ने ट्रस्ट डीड में निर्धारित योग्यता मानकों को पूरा नहीं किया।
मिस्त्री के अनुसार, ट्रस्ट डीड के क्लॉज 6 और 18 के तहत यदि कोई ट्रस्टी आवश्यक शर्तों को पूरा नहीं करता, तो उसे ‘deemed dead’ यानी कानूनी रूप से पद के लिए अयोग्य माना जा सकता है। इस आधार पर उन्होंने संबंधित प्राधिकरण से मामले की जांच शुरू करने और सभी ट्रस्टियों से अपनी योग्यता का हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देने की मांग की है।
क्या है योग्यता पर विवाद?
विवाद की जड़ दो प्रमुख शर्तों से जुड़ी है। मिस्त्री का दावा है कि ट्रस्टी बनने के लिए उम्मीदवार का मुंबई का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है, जबकि श्रीनिवासन और विजय सिंह इस शर्त को पूरा नहीं करते। इसी आधार पर उन्होंने दोनों की नियुक्ति को चुनौती दी है।
हालांकि, इस मामले में अभी तक संबंधित पक्षों की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन कानूनी प्रक्रिया शुरू होने से ट्रस्ट के भीतर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।
‘बाई हीराबाई चैरिटेबल ट्रस्ट’ क्या है?
Bai Hirabai Jamshedji Tata Navsari Charitable Institution की स्थापना वर्ष 1923 में की गई थी। यह संस्था मुख्य रूप से गुजरात के नवसारी क्षेत्र में पारसी समुदाय और अन्य जरूरतमंद वर्गों के कल्याण के लिए काम करती है। इसके प्रमुख कार्यक्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं।
यह ट्रस्ट Sir Ratan Tata Trust सहित टाटा समूह के अन्य परोपकारी संगठनों से भी जुड़ा हुआ है और कई मामलों में इनके साथ बोर्ड स्तर पर समन्वय रखता है। टाटा ट्रस्ट्स भारत के सबसे बड़े परोपकारी नेटवर्क में से एक माने जाते हैं, जिनकी गतिविधियां देशभर में फैली हुई हैं।
इस्तीफे के मायने क्या हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि श्रीनिवासन का इस्तीफा केवल औपचारिक कारणों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ट्रस्ट के भीतर चल रहे कानूनी और प्रशासनिक दबाव का संकेत भी हो सकता है। हालांकि, जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक इस मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
फिलहाल, यह घटनाक्रम टाटा ट्रस्ट्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पारदर्शिता और गवर्नेंस को लेकर नए सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की कार्रवाई और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी।

