नई दिल्ली/चंडीगढ़:
देश के कई हिस्सों में अचानक बदले मौसम ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। मंगलवार को पंजाब, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा और झारखंड समेत कई राज्यों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचाई। जहां एक ओर किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं, वहीं दूसरी ओर हवाई सेवाएं और यातायात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दिनभर काले बादल छाए रहे और तेज हवाओं के साथ बारिश होती रही। मौसम में यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ और हवा के पैटर्न में परिवर्तन के कारण आया। इसका सीधा असर हवाई यातायात पर पड़ा। खराब मौसम और कम दृश्यता के चलते इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर करीब 300 उड़ानें प्रभावित हुईं। इनमें से कई उड़ानों को देरी का सामना करना पड़ा, जबकि 22 विमानों को लैंडिंग की अनुमति नहीं मिलने पर जयपुर, लखनऊ, अमृतसर और अहमदाबाद की ओर डायवर्ट किया गया।
पंजाब में स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है। लगातार हो रही बारिश और ओलावृष्टि के कारण गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई है। कृषि मंत्री गुरमीत खुड्डियां के अनुसार राज्य में लगभग सवा लाख एकड़ गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है। यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ, तो गेहूं के दानों के काले पड़ने का खतरा भी बना हुआ है, जिससे किसानों को और अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा सरसों और बागवानी फसलों को भी व्यापक क्षति हुई है।
ओडिशा में भी मौसम का कहर देखने को मिला। मयूरभंज जिले के पलासबदा गांव में एक छह वर्षीय बच्चे की वज्रपात की चपेट में आने से मौत हो गई। भुवनेश्वर, रायगढ़ा, बलांगीर और जाजपुर समेत कई जिलों में फसलों को नुकसान पहुंचा है। तेज हवाओं के कारण कई कच्चे मकानों की छतें उड़ गईं और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई।
जम्मू-कश्मीर के बांडीपोरा जिले में भी ओलावृष्टि से बागवानी को बड़ा नुकसान हुआ है। बागवानी विभाग के अनुसार करीब 25 प्रतिशत तक फसलों को नुकसान पहुंचा है। पेड़ों की पत्तियां फट गईं और फूल झड़ गए, जिससे सेब और अन्य फलों की पैदावार प्रभावित होने की आशंका है।
झारखंड में भी मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए अलर्ट जारी किया है। कई जिलों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह पूरा मौसम परिवर्तन पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय चक्रवाती परिसंचरण के संयुक्त प्रभाव का परिणाम है। फिलहाल अगले कुछ दिनों तक मौसम के ऐसे ही बने रहने की संभावना जताई जा रही है, जिससे आम जनजीवन और कृषि दोनों पर असर पड़ सकता है।

