Korba / pasan :: कोरबा जिला के ग्राम पंचायत पसान में लोग जान जोखिम में डालकर सरकारी राशन लेने के लिए मजबूर है.
मामला कोरबा जिले के ग्राम पंचायत पसान के उचित मूल्य दुकान का है. यह दुकान एक ऐसे भवन में चल रही है, जिसकी हालात उतना अच्छा नहीं है. लंबी कतारों में घंटों इंतजार करने वाले लोग न केवल बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं, बल्कि आधा अधूरा राशन सामग्री लेकर घर जाने को विवश हैं ,हर माह वितरक का रटा रटाया जवाब मिलता है की राशन सामग्री पूरा मात्रा में नही आया है ,
छत्तीसगढ़ सरकार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली सस्ते अनाज का वादा तो करती है, लेकिन स्थानीय प्रशासन की अनदेखी ने पसान के लोगों को मुसीबत में डाल दिया है. राशन दुकान में न बैठने की जगह है न और न ही शौचालय. अगर किसी को वॉशरूम की जरूरत पड़े, तो घर लौटना पड़ता है, जिससे उनका नंबर छूट जाता है और दिन बर्बाद हो जाता है.
महिलाओं को सबसे ज्यादा मुसीबत
छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए महतारी वंदन योजना संचालित कर रही है, लेकिन इस राशन दुकान में सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को ही हो रही है. महिलाएं अपने बच्चों के साथ कतार में घंटों खड़ी रहती हैं. स्थानीय लोग कहते हैं, “प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है.”
सरपंच राशन दुकान की समस्या से अनभिज्ञ , ,क्या मामला मलाई मिठाई का हो गया हैं

जब ग्राम पंचायत पसान के सरपंच सुरेंद्र तिग्गा से इस बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि राशन दुकान मे किये गए व्यवस्था के बारे में मुझे जानकारी नहीं है मैं अभी तक राशन दुकान में वितरण व्यवस्था का निरीक्षण नही किया हु इसलिए मुझे जानकारी नही है ,

सुरेंद्र तिग्गा जो अभी ग्राम पंचायत चुनाव में ग्रामीण गरीबी रेखा में जीवन यापन करने करने वाले मतदाताओं के समर्थन से चुनाव जीतकर सरपंच बने हैं ,चुनाव जीतने के कुछ दिन में ही उन्होंने गरीब परिवार की सुध लेना भूल गए , 1300 हितग्राही किस हालात में राशन ले रहे हैं इसकी उनको परवाह नहीं है , राशन डीलर द्वारा लोगो के हिस्से का राशन की कमाई कही मलाई मिठाई खिलाने में तो खर्च नही हो रही है ,
चना की खबर से बौखलाए राशन दुकान संचालक ने खबर डिलीट करने का दबाव बनवाया ,इसलिए ग्रामीणों के लिए यह खबर भी बनता है
*“चना गया चूल्हे के पार – पसान में चने पर मचा बवाल!”*
कोरबा ज़िले के ग्राम पंचायत पसान में चना नहीं मिल रहा… और जनता चना चबाने पर मजबूर है – वो भी बिना चने के!
पसान की जनता का सवाल:
“आबंटन होता है टन में, पर थैली में आता है ग्राम में!”
कहीं चना गायब, कहीं गिनकर दाने…
अब चने को देखने के लिए भी चश्मा लगाना पड़ रहा है!
महंगाई की मार, चने की टंकी हुई बेकार!
जिस चने से सब्जी की कमी पूरी होती थी,
वही चना अब राशन दुकान में छुप-छुपकर बैठा है!
पूछो क्यों?
क्योंकि कहीं न कहीं कोई ना कोई चना चबाकर मुस्कुरा रहा है…
गांव की एक दादी का बयान:
“पहले चना मिलता था, अब तो दुकानदार कहता है – ‘आ गया दादी, मगर सपना में!’”
अब जनता ने दी चेतावनी:
अगर चना नहीं मिला, तो अगली बार सभा नहीं, सब्जी बॉयकॉट होगा!
और नेता जी को खुद आकर चना-सांभर पकाना पड़ेगा!
प्रशासन से सवाल:
चना गया कहां?
क्या पसान का चना किसी VIP थाली में परोसा जा रहा है?
या फिर ये भी किसी “चना घोटाले” का ट्रेलर है?
पसान की जनता का सीधा संदेश:
“चना चाहिए… चीनी नहीं!”
“दाना-दाना हिसाब चाहिए, वरना वोट नहीं मिलेगा, ये जनाब जान लें!”

