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Thursday, April 16, 2026

कोरबा धान उपार्जन केंद्र बिजली समस्या: हाथियों के बढ़ते खतरे के बीच बढ़ी सुरक्षा चिंता

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CG City News

कोरबा (cgcitynews)//    कोरबा धान उपार्जन केंद्र मे बिजली समस्या इन दिनों गंभीर रूप लेती जा रही है…  धान उपार्जन केंद्र मे बिजली की समस्या  ग्रामीणों और केंद्रों में काम कर रहे कर्मचारियों के लिए गंभीर चुनौती बन गई है। जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में जहां एक ओर धान खरीदी का सीजन चल रहा है, वहीं दूसरी ओर हाथियों का बढ़ता मूवमेंट लगातार दहशत पैदा कर रहा है। ऐसे में रात्रि के समय सीएसईबी द्वारा 9 घंटे बिजली आपूर्ति ठप्प करने से धान उपार्जन केंद्रों की सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगा है।
रात 10 बजे से सुबह 7 बजे तक अंधेरा—कर्मचारी और ग्रामीण परेशान
जानकारी के अनुसार पिछले दो दिनों से सीएसईबी ने कोरबा ब्लॉक के कई उपार्जन केंद्रों और आसपास के गांवों में रात 10 बजे से बिजली आपूर्ति बंद करना शुरू कर दिया है। विभाग का कहना है कि हाथियों के खतरे को देखते हुए यह एहतियातन कदम उठाया गया है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली काटकर सीएसईबी ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथी खतरे की वजह से पहले से ही सतर्क रहना पड़ता है, ऐसे में पूरी रात अंधकार में रहना मजबूरी बन गया है। उपार्जन केंद्रों के कर्मचारियों का कहना है—“अंधेरे में तो हाथी कहीं से भी प्रवेश कर सकता है, ऐसे में अपनी और धान की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती है।”
कई धान केंद्र प्रभावित—50 हजार से अधिक की आबादी पर असर
बरपाली (जिल्गा), चचिया, कुदमुरा, चिर्रा और श्यांग सहित कई धान उपार्जन केंद्र दो अलग-अलग फीडरों से जुड़े हैं, लेकिन दोनों क्षेत्रों में रात्रिकालीन बिजली कटौती से हालात बिगड़ रहे हैं। इन केंद्रों में बड़ी संख्या में किसानों का पंजीकरण है और रोज बड़ी मात्रा में धान खरीदी हो रही है।
लगातार 9 घंटे बिजली न रहने से इन क्षेत्रों की 50 हजार से ज्यादा आबादी रात भर असुरक्षा की स्थिति में रहती है।
हाथियों की बढ़ती गतिविधि से बढ़ा तनाव
हाल ही में जंगल क्षेत्रों में हाथियों की गतिविधि काफी बढ़ी है। वन विभाग की ओर से नियंत्रण के दावे भले किए जा रहे हों, लेकिन जमीनी हालात अलग तस्वीर दिखा रहे हैं। पिछले वर्ष करतला क्षेत्र में बिजली तार में उलझकर एक हाथी की मौत के बाद वन विभाग ने सीएसईबी पर कार्रवाई की थी। जिसके बाद बोर्ड ने समाधान के रूप में खतरा बढ़ने पर रात की बिजली सप्लाई बंद करने का निर्णय लागू किया था।
अंधेरे में सुरक्षा व्यवस्था ठप
उपार्जन केंद्रों में 7–8 कर्मचारियों को रात में सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है। प्रशासन के निर्देश पर इन केंद्रों में चारों तरफ हैलोजन लाइट्स लगाई गई हैं ताकि किसी भी प्रकार की चोरी-चकारी या अन्य खतरे को रोका जा सके। लेकिन सीएसईबी की रात की बिजली कटौती से सुरक्षा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
कर्मचारियों ने सवाल उठाया है—“केंद्रों में धान की सुरक्षा किसकी जिम्मेदारी? अगर हाथियों के कारण कोई नुकसान होता है तो क्या इसकी भरपाई सीएसईबी करेगा?”
निष्कर्ष
कोरबा जिले के ग्रामीण और धान खरीदी केंद्र लगातार बिजली कटौती और हाथियों के खतरे के दोहरे संकट का सामना कर रहे हैं। बिजली विभाग द्वारा उठाया गया एहतियाती कदम सुरक्षा के लिहाज से फायदेमंद है या परेशानी बढ़ाने वाला—इस पर प्रशासनिक स्तर पर पुनर्विचार की जरूरत महसूस की जा रही है।

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