बर्फ की तलाश छोड़िए, छत्तीसगढ़ की इस ‘गुलाबी ठंड’ को ओढ़िए-कवर्धा में 7-12 डिग्री तापमान, सर्दी से राहत।

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सर्दियों में कड़कड़ाती ठंड से बचने वालों के लिए छत्तीसगढ़ एक बेहतरीन विकल्प है। रायपुर से 120 किमी दूर कवर्धा, मैकल पर्वत श्रृंखला में स्थित है, जहां न्यूनतम तापमान 7-12 डिग्री रहता है। यहां प्राचीन भोरमदेव मंदिर, चिल्फी घाटी, रानी दहरा जलप्रपात और सरोधा दादर का बैगा एथनिक रिसोर्ट प्रमुख आकर्षण हैं। यह क्षेत्र प्रकृति, इतिहास और संस्कृति का संगम प्रदान करता है, साथ ही डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी मंदिर भी है।

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HighLights

  1. कवर्धा में 7-12 डिग्री तापमान, सर्दी से राहत।
  2. प्राचीन भोरमदेव मंदिर और बैगा एथनिक रिसोर्ट प्रमुख आकर्षण।
  3. चिल्फी घाटी, रानी दहरा जलप्रपात और डोंगरगढ़ मंदिर दर्शनीय।

 सर्दियों के मौसम में पर्यटक बर्फ से ढके पहाड़ों की ओर रुख करते हैं, लेकिन जो यात्री कड़कड़ाती ठंड और भारी बर्फबारी से बचते हुए ठंडक का आनंद लेना चाहते हैं, उनके लिए छत्तीसगढ़ एक बेहतर विकल्प है। यहां प्रकृति की हरियाली, इतिहास की गहराई और संस्कृति की आत्मीयता, तीनों का संगम एक साथ महसूस होता है। राजधानी रायपुर से लगभग 120 किलोमीटर दूर स्थित कवर्धा जिला ऐसी ही अनुभूति कराता है।

मध्यप्रदेशछत्तीसगढ़ की सीमा से सटा यह इलाका मैकल पर्वत श्रृंखला की गोद में बसा है, जहां सर्दियों में न्यूनतम तापमान सात से 12 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। न ज्यादा ठंड, न ज्यादा भीड़, बस खुली हवा और पहाड़ियों की शांति।

कवर्धा की पहचान 11वीं शताब्दी के प्राचीन भोरमदेव मंदिर से है। पत्थरों पर उकेरी गई बारीक नक्काशियां और जीवंत मूर्तियां देखते ही बनती हैं। मंदिर की दीवारों पर कामसूत्र की 54 मुद्राओं की शिल्पकला कला प्रेमियों को खास तौर पर आकर्षित करती है।

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परिसर में मंडवा महल, छेरकी महल जैसे ऐतिहासिक स्थापत्य भी मौजूद हैं। प्रकृति प्रेमियों के लिए चिल्फी घाटी, पीठाघाट वाचटावर, रानी दहरा जलप्रपात और सरोधा दादर दोतीन दिनों की पारिवारिक यात्रा के लिए आदर्श स्थल हैं। सरोधा दादर में स्थित बैगा एथनिक रिसार्ट खास आकर्षण है, जहां से पहाड़ियों का 360 डिग्री दृश्य दिखाई देता है।

यहां आरामदायक ठहराव, स्थानीय स्वाद से भरा भोजन और आसपास की वादियों में ट्रेकिंग का आनंद लिया जा सकता है। इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए पास ही स्थित पचराही पुरातात्विक स्थल एक और ठहराव है, जहां प्राचीन अवशेष अतीत की परतें खोलते हैं।

सरोधा दादर का बैगा एथनिक रिसोर्ट

जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर चिल्फी घाटी की गोद में बसा सरोधा दादर प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी रत्न से कम नहीं है। घने जंगलों, पहाड़ियों और शुद्ध हवा के बीच स्थित यह गांव बैगा आदिवासियों का प्रमुख गढ़ माना जाता है। यहां 11 एकड़ पहाड़ी भूमि पर बैगा एथनिक रिसोर्ट बनाया गया है, जिसमें वुडन और डीलक्स हाउस हैं।

यहां पर्यटक बैगा जनजाति की पारंपरिक दिनचर्या, वेशभूषा, लोककला और संस्कृति से सीधे रूबरू होते हैं। शनिवार और रविवार को आयोजित आदिवासी नृत्य, गीत और ढोल-मांदर की थाप पर्यटकों को लोकसंस्कृति से जोड़ देती है। पीठाघाट वाचटावर से घाटी और पर्वतों का मनोरम दृश्य दिखता है। ट्रेकिंग और कैंपिंग के लिए यह जगह आदर्श है।

हरी-भरी पहाड़ियों से सरोधा जलाशय

सरोधा जलाशय हरी-भरी पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यहां घने जंगलों के बीच रानीदहरा, दुरदुरी और मांदाघाट जलप्रपात स्थित हैं। रानीदहरा जलप्रपात बोड़ला से चिल्फी मार्ग पर, कवर्धा से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां लगभग 40 फीट की ऊंचाई से गिरता पानी और घने जंगलों के बीच बहती ठंडी हवाएं सुकून देती हैं। भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य में फिलहाल पर्यटकों का प्रवेश बंद है, हालांकि बाहरी क्षेत्र में भ्रमण किया जा सकता है। इसके लिए जामुनपानी गेट और सरोधा जलाशय मार्ग से प्रवेश करना होगा।

फेन सफारी में वन्यजीवों का दर्शन

छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की जनसंपर्क अधिकारी अनुराधा दुबे ने बताया कि बैगा एथनिक रिसोर्ट से फेन वन्यजीव अभयारण्य की सफारी के लिए वाहन उपलब्ध हो जाते हैं। यह अभयारण्य पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश के मंडला जिले में स्थित है। फेन वन्यजीव अभयारण्य कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के समीप स्थित एक महत्वपूर्ण बफर क्षेत्र है। यह तेंदुआ, बाघ, सांभर और चीतल जैसे वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है और अपनी समृद्ध जैव विविधता तथा प्रकृति-प्रेमी सफारी के लिए जाना जाता है।

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ऊंची पहाड़ी पर मां बम्लेश्वरी मंदिर

अगर आप ट्रेन के रास्ते नागपुर होकर रायपुर आ रहे हैं, तो डोंगरगढ़ स्टेशन पर उतरकर मां बम्लेश्वरी के दर्शन कर सकते हैं। यहीं से आप कवर्धा भी जा सकते हैं। महाराष्ट्र की सीमा से सटा यह धार्मिक स्थल राजनांदगांव जिले में स्थित है। यहां चारों ओर पहाड़ियों से घिरे लगभग 1600 फीट की ऊंचाई पर शक्तिपीठ विराजमान है। श्रद्धालु सीढ़ियों से पैदल या रोपवे के माध्यम से मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। डोंगरगढ़ में प्रज्ञागिरि, चंद्रगिरि पहाड़ी और छोटे बम्लेश्वरी मंदिर भी प्रमुख आकर्षण हैं।

कैसे पहुंचे और कहां रुके

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रायपुर एयरपोर्ट, स्टेशन, राजनांदगांव, डोंगरगढ़ व दुर्ग और बिलासपुर स्टेशन से आप आसानी से कवर्धा पहुंच सकते हैं। रायपुर से कवर्धा के लिए नान स्टाप एसी बसें उपलब्ध है। महज ढाई घंटे में यहां पहुंचा जा सकता है। जिले में रुकने के लिए सरोधा दादर के रिसार्ट, जंगल रिसार्ट, तक्षक रिसार्ट सहित अभयारण्य के पास और शहर में सस्ते दर पर होटल उपलब्ध है। सरोधा स्थित बैगा एथनिक रिसोर्ट में आनलाइन बुकिंग के लिए आप पर्यटन बोर्ड के नंबर 7714224999 व 9424877975 पर भी संपर्क कर सकते हैं।


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