मध्य प्रदेश में दूषित पानी का कहर जारी, जीबीएस से दो बच्चों की मौत; NGT ने बताया- जन स्वास्थ्य आपातकाल

IMG-20230522-WA0021
previous arrow
next arrow
CG City News

मध्य प्रदेश के नीमच जिले के मनासा कस्बे में दो बच्चों की मौत के बाद जीबीएस (गिलियन बार्रे ¨सड्रोम) से दहशत है। नगर परिषद अध्यक्ष डा. सीमा तिवारी के अनुसार, अब तक जीबीएस के 11 मामले सामने आ चुके हैं, दो की मौत हो चुकी है। नौ रोगियों का इलाज मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के अस्पतालों में चल रहा है। अधिकांश की सेहत में सुधार है।

News Article Hero Image

HighLights

  1. मध्य प्रदेश में जीबीएस से दो बच्चों की मौत, नौ रोगी तीन राज्यों में भर्ती
  2. नीमच मेडिकल कालेज व स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञ मनासा कस्बे पहुंचे
  3. घर-घर सर्वे कर पीडि़तों की जुटाई जा रही जानकारी, पानी की शुद्धता जांची

मध्य प्रदेश के नीमच जिले के मनासा कस्बे में दो बच्चों की मौत के बाद जीबीएस (गिलियन बार्रे ¨सड्रोम) से दहशत है। नगर परिषद अध्यक्ष डा. सीमा तिवारी के अनुसार, अब तक जीबीएस के 11 मामले सामने आ चुके हैं, दो की मौत हो चुकी है। नौ रोगियों का इलाज मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के अस्पतालों में चल रहा है। अधिकांश की सेहत में सुधार है।

स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर सर्वे कर पीड़ितों का पता लगा रही हैं। कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने शासकीय मेडिकल कालेज नीमच के पांच डॉक्टरों की टीम मनासा भेजी है।

भोपाल से भी स्वास्थ्य विभाग की टीम बुलाई गई है, लेकिन अब तक बीमारी की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई। प्रभारी सीएमओ रविश कादरी ने सभी वार्डों से पानी के सैंपल लेकर जांच कराई है।

वहीं, कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने कहा कि सात रोगियों में से दो पूर्ण रूप से स्वस्थ हो चुके हैं। दो आइसीयू में हैं और बाकी तीन भी रिकवर हो रहे हैं। उम्मीद है स्थिति जल्द सामान्य होगी।

क्या है जीबीएस

चिकित्सकीय भाषा में जीबीएस को गिलियन बार्रे सfxड्रोम कहते हैं, जिसकी शुरुआत पैरों से होती है। पैरों में दर्द और अकड़न होती है। मांसपेशियों से होते हुए संक्रमण नसों तक फैलता है। यह एक तरह की आटो इम्यून बीमारी है।

लोग इसे लकवा की तरह समझते हैं, लेकिन संक्रमण अधिक फैल जाने से मरीज को बचाना मुश्किल हो जाता है। अक्सर किसी वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण (जैसे पेट या श्वसन संक्रमण) के बाद यह विकार पनपता है। जी

जल प्रदूषण एक जन स्वास्थ्य आपातकाल: भोपाल हरित न्यायाधिकरण

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की भोपाल पीठ ने मध्य प्रदेश में दूषित पेयजल आपूर्ति की स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे एक “व्यवस्थित पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल” घोषित किया है। ट्रिब्यूनल ने चेतावनी दी है कि जल पाइपलाइनों में सीवेज के रिसाव के कारण प्रदेश के लाखों नागरिक गंभीर बीमारियों और मृत्यु के जोखिम का सामना कर रहे हैं।


CG City News

Related Articles

[td_block_social_counter facebook="tagdiv" twitter="tagdivofficial" youtube="tagdiv" style="style8 td-social-boxed td-social-font-icons" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjM4IiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiMzAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3Njh9" custom_title="Stay Connected" block_template_id="td_block_template_8" f_header_font_family="712" f_header_font_transform="uppercase" f_header_font_weight="500" f_header_font_size="17" border_color="#dd3333"]

Latest Articles

error: Content is protected !!