बस्तर : अगर आप इस जनवरी की छुट्टियों को सिर्फ रजाई में दुबक कर या शहर के शोर-शराबे वाले मॉल में बिताने की सोच रहे हैं, तो रुकिए! भारत के दिल यानी छत्तीसगढ़ के बस्तर में कुदरत ने एक ऐसा संसार सजाया है, जो किसी हॉलीवुड फिल्म के सेट जैसा महसूस होता है। यहाँ की हवाओं में जंगलों की खुशबू है, पहाड़ों पर बादलों का बसेरा है और घाटियों में गूंजती झरनों की आवाज आपको एक अलग ही सुकून की दुनिया में ले जाती है। बस्तर अब सिर्फ नक्शे पर एक नाम नहीं, बल्कि उन मुसाफिरों के लिए स्वर्ग बन चुका है जो रोमांच और शांति की तलाश में रहते हैं।
बस्तर की खूबसूरती की सबसे खास बात यह है कि यहाँ हर मोड़ पर एक नया अजूबा आपका इंतजार कर रहा है। कहीं आप बीजापुर के रेतीले किनारों पर टहलते हुए गोवा जैसा अहसास करेंगे, तो कहीं 3000 फीट की ऊंचाई पर पहाड़ की चोटी पर बैठे रहस्यमयी गणपति के सामने नतमस्तक हो जाएंगे। यहाँ के झरने सिर्फ पानी की धाराएं नहीं हैं, बल्कि वे कहीं संगीत सुनाते हैं तो कहीं अपने चुंबकीय प्रभाव से विज्ञान को चुनौती देते नजर आते हैं। यह धरती जितनी प्राचीन है, यहाँ का पर्यटन उतना ही आधुनिक और रोमांचक होता जा रहा है।
बस्तर की रहस्यमयी जगहें::

आज का बस्तर बदल चुका है। अब यहाँ पहुंचना उतना ही आसान है जितना किसी बड़े हिल स्टेशन पर जाना। जगदलपुर तक हवाई सेवा, रेल मार्ग और बेहतरीन सड़कों के जाल ने इस अनछुए खजाने के दरवाजे पूरी दुनिया के लिए खोल दिए हैं। चाहे आप दोस्तों के साथ कैंपिंग और ट्रैकिंग का प्लान बना रहे हों, या परिवार के साथ कुदरत की गोद में कुछ पल बिताना चाहते हों, बस्तर के ये 13 टूरिस्ट स्पॉट आपकी लिस्ट में सबसे ऊपर होने चाहिए। आइए, विस्तार से जानते हैं बस्तर के उन नजारों के बारे में जो आपकी धड़कनें तेज कर देंगे।
बस्तर की रहस्यमयी जगहें::

चित्रकोट जलप्रपात: भारत का अपना नियाग्रा
बस्तर की पहचान है चित्रकोट। इंद्रावती नदी जब 90 फीट की ऊंचाई से घोड़े की नाल के आकार में नीचे गिरती है, तो नजारा देखते ही बनता है। सर्दियों में इसकी दूधिया धाराएं और नीचे स्थित प्राचीन गुफा में भोलेनाथ का प्राकृतिक जलाभिषेक देखना एक आध्यात्मिक अनुभव है। आप यहाँ नीचे जाकर बोटिंग का आनंद भी ले सकते हैं।
तीरथगढ़: पत्थरों पर नाचती सफेद लहरें
कांगेर घाटी नेशनल पार्क में स्थित तीरथगढ़ जलप्रपात अपनी सीढ़ीनुमा बनावट के लिए मशहूर है। यहाँ पानी एक झटके में नीचे नहीं गिरता, बल्कि कुदरती सीढ़ियों पर अटखेलियां करते हुए आता है। ठंड के मौसम में यह पानी सफेद मोतियों की माला जैसा चमकता है, जो पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
धुड़मारास: दुनिया के नक्शे पर चमकता गाँव
क्या आप जानते हैं कि UN ने दुनिया के 60 बेहतरीन गाँवों की लिस्ट में बस्तर के धुड़मारास को शामिल किया है? यहाँ आप बैंबू राफ्टिंग और कयाकिंग का मजा ले सकते हैं। कांगेर नदी के किनारे बसे इस गाँव का होम-स्टे कल्चर आपको सीधे जड़ों से जोड़ देता है।
मट्टी मरका: बीजापुर का अपना ‘मिनी गोवा’
बीजापुर के भोपालपट्नम में स्थित मट्टी मरका को यहाँ का गोवा कहा जाता है। इंद्रावती नदी के किनारे मीलों तक फैली सुनहरी रेत और विशाल पत्थरों के बीच से बहता पानी आपको समंदर के किनारे होने का अहसास कराता है। यह पिकनिक और फोटोग्राफी के लिए बस्तर की सबसे बेस्ट जगह है।
नीलम सरई: ट्रैकिंग प्रेमियों का नया ठिकाना
अगर आपको पहाड़ों पर चढ़ने का शौक है, तो नीलम सरई आपके लिए ही है। बीजापुर के उसूर में तीन ऊंची पहाड़ियों को पार करके यहाँ पहुंचना किसी रोमांचक फिल्म जैसा लगता है। 7 किमी की इस कठिन ट्रैकिंग के बाद जब आप इस झरने को देखते हैं, तो सारी थकान गायब हो जाती है।
नंबी जलधारा: धरती से 300 फीट ऊपर का रोमांच
नंबी जलप्रपात को बस्तर की सबसे ऊंची जलधारा कहा जाता है। 300 फीट की ऊंचाई से गिरता पानी जब नीचे गिरता है, तो इसकी बारीक फुहारें पूरे माहौल को ठंडा कर देती हैं। घने जंगलों के बीच छिपा यह स्थान एडवेंचर के शौकीनों के लिए किसी खजाने से कम नहीं है।
दोबे: जहाँ पत्थरों का अपना एक परिवार है
नीलम सरई के पास ही स्थित ‘दोबे’ एक अद्भुत जगह है। इसे पत्थरों का गाँव कहा जाता है क्योंकि यहाँ प्रकृति ने पत्थरों को ऐसे तराशा है जैसे वे कोई इंसानी कलाकृति हों। यहाँ चट्टानों की खोह में रात गुजारना पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण बन गया है।
लंका पल्ली: बारह महीने बहता कुदरत का संगीत
बीजापुर के लंका पल्ली गाँव में स्थित यह झरना अपनी निरंतरता के लिए जाना जाता है। चाहे गर्मी हो या ठंड, यहाँ की जलधारा कभी कम नहीं होती। स्थानीय लोग इसे ‘बोक्ता’ कहते हैं। अगर आप दोस्तों के साथ नाइट कैंपिंग का मन बना रहे हैं, तो इससे बेहतर जगह नहीं मिलेगी।
यह भी पढ़े 👇
https://cgcitynews.com/indian-bison-brought-to-bandhavgarh-growing-family/
इंचमपल्ली बांध: गोदावरी के किनारे इतिहास की झलक
गोदावरी नदी पर बना यह अधूरा बांध अब एक टूरिस्ट स्पॉट बन चुका है। इसकी विशाल दीवारें और बनावट किसी ऐतिहासिक किले की याद दिलाती हैं। यह इलाका छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की सीमा पर स्थित है और फोटोग्राफी के लिए एक जबरदस्त बैकड्रॉप देता है।
झारालावा: विज्ञान को चुनौती देता रहस्यमयी झरना
दंतेवाड़ा के जंगलों में छिपा झारालावा जलप्रपात अपने आप में एक पहेली है। यहाँ की चट्टानों में चुंबकीय शक्ति इतनी ज्यादा है कि आपके मोबाइल और कैमरे जैसे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस काम करना बंद कर सकते हैं। इस झरने तक पहुंचने का रास्ता भी किसी चुनौती से कम नहीं है।
मिचनार हिल टॉप: जहाँ आप बादलों से बात करते हैं
जगदलपुर के पास स्थित मिचनार की पहाड़ी उन लोगों के लिए है जो ऊंचाई से दुनिया देखना चाहते हैं। खड़ी चढ़ाई के बाद जब आप टॉप पर पहुंचते हैं, तो नीचे बिछी गहरी खाइयां और हरियाली की चादर आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाती है।
हांदावाड़ा: असली ‘बाहुबली’ वाटरफॉल
नारायणपुर और दंतेवाड़ा की सीमा पर स्थित हांदावाड़ा जलप्रपात को इसकी विशालता के कारण ‘बाहुबली जलप्रपात’ कहा जाता है। इंद्रावती नदी पर पुल बनने के बाद अब यहाँ पहुंचना पहले से आसान हो गया है। बारिश और ठंड के शुरुआती दिनों में इसकी खूबसूरती चरम पर होती है।
ढोलकल शिखर: गणपति की आस्था का सर्वोच्च केंद्र
दंतेवाड़ा के ढोलकल शिखर पर करीब 3000 फीट की ऊंचाई पर भगवान गणेश की प्रतिमा विराजमान है। घने जंगलों और पहाड़ों के बीच विराजे इन गणेश जी के दर्शन के लिए दुनिया भर से लोग आते हैं। माना जाता है कि यहाँ भगवान परशुराम और गणेश जी के बीच भीषण युद्ध हुआ था।
बस्तर का यह सफर न केवल आपको कुदरत के करीब लाएगा, बल्कि यहाँ की हवाई, रेल और सड़क कनेक्टिविटी आपके सफर को आरामदायक भी बनाएगी। जगदलपुर, दंतेवाड़ा और बीजापुर में रुकने के लिए बेहतरीन होटल और रिसॉर्ट्स मौजूद हैं। तो इस जनवरी, बस्तर बुला रहा है!
https://chhattisgarhtourism.in


