झाबुआ के पाड़लवा मॉडल स्कूल के छात्रों ने खराब स्कूल व्यवस्था के खिलाफ 15 किमी पैदल चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर को अपनी समस्याएँ बताईं। छात्रों ने दूषित पानी, जर्जर शौचालय, असुरक्षित बिजली ट्रांसफार्मर और शैक्षणिक सुविधाओं की कमी की शिकायत की। कलेक्टर नेहा मीना ने उनकी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। यह विरोध छात्रों की लंबे समय से अनसुनी मांगों का परिणाम था।
- पाड़लवा मॉडल स्कूल के विद्यार्थियों ने अनूठे ढंग से जताया विरोध।
- रास्ते में अधिकारियों ने की रोकने की कोशिश, लेकिन विद्यार्थी नहीं माने।
- विधायक विक्रांत भूरिया ने भी विद्यार्थियों से मुलाकात कर समस्याएं जानीं।
प्रदेश के आदिवासी बहुल झाबुआ जिले में रानापुर से सटे पाड़लवा से मॉडल स्कूल के विद्यार्थियों का समूह 15 किमी पैदल चलकर शुक्रवार को कलेक्ट्रेट पहुंचा। छात्र जिला मुख्यालय आकर कलेक्टर को ही समस्या बताने पर अड़े रहे। रास्ते में उन्हें रोकने के प्रयास विफल रहे। कई अधिकारी व कर्मचारी विद्यार्थियों को मनाने के चक्कर में पैदल भी चले। आखिरकार विद्यार्थी कलेक्ट्रेट आए और उन्होंने अपनी समस्या कलेक्टर के समक्ष रखी। कलेक्टर नेहा मीना ने विद्यार्थियों को उनकी समस्या हल करवाने का भरोसा दिलवाया।
विद्यार्थी शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे पाड़लवा से पैदल निकल पड़े। सूचना पर बारी-बारी से सरकारी अधिकारी व कर्मचारी जाने लगे। समस्या सुनकर हल करने का भरोसा दिलवाया जाता रहा, लेकिन विद्यार्थी नहीं माने। उन्हें बस में भी बैठने का कहा गया, मगर वे पैदल ही झाबुआ जाने पर अड़े रहे।
दोपहर ढाई बजे तक यह घटनाक्रम चलता रहा। फिर झाबुआ में वे कलेक्टर मीना से मिले और समस्या बताई। विधायक डॉक्टर विक्रांत भूरिया ने भी विद्यार्थियों से चर्चा की। विद्यार्थियों का आरोप था कि विद्यालय में लंबे समय से शिक्षा, सुरक्षा और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। पूर्व में शिकायत करने पर राजनीतिक दबाव के चलते उनकी आवाज को दबा दिया गया था।
यह बताईं समस्याएं
- विद्यार्थियों को कुएं का दूषित पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, क्योंकि स्कूल की जल आपूर्ति की पाइपलाइन पिछले एक साल से अधूरी पड़ी है।
- गंदगी से भरी पानी की टंकियां और जर्जर शौचालय बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बने हुए हैं।
- पानी के अभाव में शौचालय के लिए बाहर जाने वाले छात्रों पर सांप और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बना रहता है।
- सुरक्षा के लिहाज से सबसे बड़ी चिंता स्कूल के सामने स्थित बिजली ट्रांसफार्मर (डीपी) है, जो एक साल पहले ब्लास्ट होने के बाद भी बिना सुरक्षा जाली के पड़ा है।
- स्कूल भवन की खिड़कियां टूटी हुई हैं और पंखों की खुली वायरिंग से किसी भी वक्त बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
- शैक्षणिक स्तर पर भी स्कूल की स्थिति दयनीय है। कंप्यूटर शिक्षक, पुस्तकालय और अन्य अनिवार्य शैक्षणिक सुविधाएं नदारद हैं।
- खेल और प्रायोगिक सामग्री की कमी के कारण प्रतिभावान छात्र राज्य स्तर तक चयनित होने के बावजूद संसाधनों के अभाव में पिछड़ रहे हैं।


