*हाथियों के व्यवहार को लेकर किया शोध, बख्तावर शमीम को मिली पीएचडी की उपाधि*
रायपुर(छत्तीसगढ़ सिटी न्यूज़ ) विकास जेम्स की कलम से : :—- :::::::::::::::::::::::::::–:: बिलासपुर निवासी बख्तावर शमीम ‘सबा’
ने मैट्स यूनिवर्सिटी रायपुर से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। बख्तावर शमीम ने प्रोफेसर डॉ भावना नारायन के निर्देशन में विषय कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशन के, “ए फ्रेमवर्क टू आईडेंटिफाई द बिहेवियर ऑफ़ एलीफैंट यूजिंग मोडिफाइड डीप लर्निंग” पर यह शोध कार्य पूरा किया।
हाल ही में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त डॉ बख्तावर शमीम ने बताया कि “अपने शोध कार्य में इस विषय का चयन उन्होंने अपने पति और स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड के सदस्य मंसूर खान की प्रेरणा से हासिल किया। मंसूर खान छत्तीसगढ़ के माने हुए हाथी विशेषज्ञ हैं और उनसे हाथियों के व्यवहार के बारे में बख्तावर शमीम को बहुत कुछ सीखने को मिला।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ राज्य में जंगली हाथियों की समस्या ने विकराल रूप धारण कर लिया है, और आये दिन मानव-हाथी द्वंद्व में लोगों की जान जा रही है, वहीं अलग अलग वजहों से हाथी भी मारे जा रहे हैं। मंसूर खान अक्सर हाथी प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों को जागरूक करते हैं और हाथियों से दूर रहकर अपने व्यवहार में बदलाव लाने की सलाह देते हैं और गांव-गांव में पोस्टर बैनर चिपकाते हैं। इसे देखते हुए बख्तावर के मन मे इच्छा हुई कि वह भी इस विषय में काम करेगी और लोगों को जागरुक करेगी ताकि हाथी के स्वभाव से अनभिज्ञ लोग हाथी के पास जाकर दुर्घटना का शिकार ना बने।
अपने शोध के दौरान बख्तावर ने पति के साथ दूरस्थ वनांचल में जाकर लोगों को हाथी से दूर रहने एवं हाथी को साथी बनाने की भी अपील की और पाया कि ज्यादातर हाथी के साथ होने वाली दुर्घटनाएं अज्ञानता व सूचना के अभाव में ही होती हैं। इस दौरान एशिया के हाथी विशेषज्ञ स्वर्गीय अजय देसाई से भी मुलाकात का अवसर मिला उन्होंने भी इस कार्य को सराहा और उनका मार्गदर्शन और उत्साह वर्धन किया।
हाथियों के व्यवहार पर शोध कार्य मे डॉ बख्तावर शमीम को प्रोफेसर डॉ भावना नारायन के अलावा
परिवारजनों एवं शुभचिंतकों का विशेष सहयोग मिला।

