नीली नहीं, कभी बैंगनी दिखती थी पृथ्वी; वैज्ञानिकों की रिसर्च में चौंकाने वाला दावा

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एक नए शोध से पता चला है कि 2.4 अरब साल पहले पृथ्वी नीली नहीं, बल्कि गहरे बैंगनी रंग की दिखती थी। ‘बैंगनी पृथ्वी परिकल्पना’ के अनुसार, उस समय सूक्ष्मजीव रेटिनल का उपयोग कर सूर्य के प्रकाश से ऊर्जा प्राप्त करते थे, जिससे ग्रह बैंगनी दिखता था। आज क्लोरोफिल के कारण पृथ्वी हरी-नीली दिखाई देती है।

 आज तक हम पढ़ते और सुनते आ रहे हैं कि अतंरिक्ष सी पृथ्वी का रंग नीला दिखता है। लेकिन नए रिसर्च में खुलासा हुआ है कि लगभग 2.4 अरब साल पहले, हमारी पृथ्वी नीली नहीं बल्कि गहरे बैंगनी रंग की दिखाई देती थी।

दरअसल,14 फरवरी, 1990 को वॉयेजर-1 ने सौरमंडल से बाहर जाते हुए आखिरी बार पृथ्वी की तस्वीर ली, तो वह एक छोटा सा ‘पेल ब्लू डॉट’ नजर आई।

आज अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखने पर यह नीली दिखाई देती है, जिसमें जगह-जगह सफेद बादल और हरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। लेकिन 2.4 अरब साल पहले यह बैगनी दिखती थी।

बैंगनी पृथ्वी परिकल्पना क्या है?

बैंगनी पृथ्वी परिकल्पना (Purple Earth Hypothesis) के अनुसार, पृथ्वी की सतह पर कभी बैंगनी रंग के सूक्ष्मजीवों का प्रभुत्व था, जो सूर्य के प्रकाश से ऊर्जा प्राप्त करने के लिए रेटिनल नामक अणु का उपयोग करते थे। नासा के एक पुराने लेख के अनुसार , रेटिनल संभवतः क्लोरोफिल और प्रकाश संश्लेषण के विकास से भी पहले मौजूद था।

वैज्ञानिकों का मानना है कि पृथ्वी पर प्रारंभिक जीवन ने प्रकाश संश्लेषण के लिए क्लोरोफिल के बजाय रेटिनल का उपयोग किया होगा। रेटिनल हरे और पीले प्रकाश को अवशोषित करता है, जबकि लाल और नीले प्रकाश को परावर्तित करता है, जिससे ग्रह को बैंगनी रंग मिलता है।

पहले क्यों बैगनी और अब कैसे हरा दिखती है पृथ्वी?

यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के प्रोफेसर शिलादित्य दास शर्मा और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, रिवरसाइड के खगोल-जैव वैज्ञानिक डॉ. एडवर्ड श्वीटरमैन के अनुसार, पृथ्वी पर शुरुआती जीवन हरे पौधों पर आधारित नहीं था। आज शुरुआती जीवन ने रेटिनल (retinal) नामक अणु का इस्तेमाल किया, जो क्लोरोफिल से भी पहले विकसित हुआ हो सकता है।

रेटिनल हरे और पीले प्रकाश को अवशोषित करता है, जबकि लाल और नीले प्रकाश को परावर्तित करता है, जिससे धरती बैंगनी रंग की दिखाई देती। वहीं, आज के समय में ज्यादातर जीव क्लोरोफिल नामक पिगमेंट से प्रकाश संश्लेषण करते हैं, जिसकी वजह से पृथ्वी अंतरिक्ष से हरी-नीली दिखाई देती है।

 


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