किसान आंदोलन मामला: सुप्रीम कोर्ट ने उच्चस्तरीय समिति से सीलबंद रिपोर्ट मांगी

IMG-20230522-WA0021
previous arrow
next arrow
CG City News

सुप्रीम कोर्ट ने 2024 के किसान आंदोलन से संबंधित शिकायतों को हल करने के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति से रिपोर्ट मांगी है। यह समिति शंभू बॉर्डर पर किसानों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी सहित अन्य मांगों पर विचार कर रही है।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन समिति से रिपोर्ट मांगी
  2. समिति MSP सहित किसानों की शिकायतें हल करेगी
  3. रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में, सार्वजनिक नहीं होगी

 2024 में पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू बार्डर पर आंदोलन करने वाले किसानों की शिकायतों को आपसी सहमति से हल करने के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति से सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट-कम-सिफारिशें देने को कहा।

किसान अपनी उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी सहित कई मांगों को लेकर विरोध कर रहे थे। धान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि हाईवे, खासकर शंभू बार्डर पर नाकाबंदी से जुड़ा मामला सुलझ गया है और वहां बिना किसी रुकावट के वाहन चल रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन समिति से रिपोर्ट मांगी

पीठ ने कहा, ‘हमें लगता है कि अब इस मामले में इन कार्यवाहियों को बंद करना सही होगा। यह उच्चाधिकार प्राप्त समिति की संक्षिप्त सुझावों वाली रिपोर्ट मिलने के बाद किया जा सकता है, जिसे फिर उचित अधिकारियों को भेजा जा सकता है।’ पीठ ने समिति से कहा कि रिपोर्ट-कम-सिफारिशें सीलबंद लिफाफे में होनी चाहिए और समिति अदालत के अगले आदेश तक इसका विवरण सार्वजनिक नहीं करेगी।

पांच सदस्यों वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति की अध्यक्षता पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व जज नवाब सिंह कर रहे हैं।सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर, 2024 में यह कहते हुए कि किसानों के विरोध का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए, उनकी शिकायतों को आपसी सहमति से हल करने के लिए समिति का गठन किया था।

समिति को MSP सहित किसानों की शिकायतें हल करनी हैं

शीर्ष अदालत ने कहा था कि किसानों के मुद्दों का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए और समिति को उन पर चरणबद्ध तरीके से विचार करना चाहिए। कोर्ट ने यह आदेश हरियाणा सरकार की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया था जिसमें पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मार्च, 2024 के आदेश को चुनौती दी गई थी।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सरकार से अंबाला के पास शंभू बार्डर पर लगाए गए बैरिकेड्स को एक हफ्ते के अंदर हटाने को कहा था, जहां प्रदर्शनकारी किसान 13 फरवरी, 2024 से डेरा डाले हुए थे।

हरियाणा सरकार ने फरवरी, 2024 में अंबाला-नई दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैरिकेड्स लगाए थे, जब संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा ने घोषणा की थी कि किसान अपनी मांगों के समर्थन में दिल्ली मार्च करेंगे।


CG City News

Related Articles

[td_block_social_counter facebook="tagdiv" twitter="tagdivofficial" youtube="tagdiv" style="style8 td-social-boxed td-social-font-icons" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjM4IiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiMzAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3Njh9" custom_title="Stay Connected" block_template_id="td_block_template_8" f_header_font_family="712" f_header_font_transform="uppercase" f_header_font_weight="500" f_header_font_size="17" border_color="#dd3333"]

Latest Articles

error: Content is protected !!