खाना बनाने के लिए एलपीजी-पीएनजी तो गाड़ी चलाने के काम आती है सीएनजी, क्या है एनएलजी का इस्तेमाल?

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इन दिनों हर तरफ LPG, PNG, CNG और LNG के नाम की ही चर्चाएं हो रही है। जिन लोगों को इन चारों ही गैसों का मतलब नहीं पता है। उन लोगों के लिए यह एक जैसे नाम की तरह ही सुनाई देता है। इसलिए अगर आपको भी इनके नाम और इस्तेमाल में कन्फ्यूज होती है, तो यह लेख आपके लिए ही है।

  1. पीएनजी गैस पाइप गैस सिलेंडर के मुकाबले सुरक्षित होती है।
  2. एलपीजी गैस प्रोपेन और ब्यूटेन से मिलकल बनती है।

 मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण देश में अब LPG, PNG, CNG और LNG पर चलने वाली चर्चाएं थमने का नाम नहीं ले रही है। देश में LPG की किल्लत दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है, जिसका सीधा असर अब हमारे घर के किचन से लेकर बाहर जाने के लिए गाड़ी की रफ्तार और रोजगार पर भी हो रहा है।

हालांकि इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार कदम तो उठा ही रही है। लेकिन क्या अभी तक आपके मन में यह सवाल आया कि आखिर एक जैसे नाम से सुनाई देने वाली LPG, PNG, CNG और LNG का क्या मतलब होता है?

अगर हां, तो आज हम आपको बेहद ही आसान भाषा में इन चारों गैस के असल मायनों के बारे में तो बताएंगे ही। साथ ही यह भी बताएंगे कि LPG, PNG, CNG और LNG का उपयोग हम अपने रोजमर्रा के जीवन में कहां करते हैं और इन चारों गैसों के बीच में क्या अंतर होता है।

LPG

एलपीजी एक लाल सिलेंडर, जो अब हमारे रोजमर्रा के जीवन का एक अहम हिस्सा बन गया है। एलपीजी का पूरा नाम (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) है। एलपीजी गैस का उपयोग खाना बनाने के लिए किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि LPG गैस प्रोपेन और ब्यूटेन गैस से मिलकर बनती है। यह गैस पेट्रोल और डीजल की तुलना में बेहद ही सस्ती एवं किफायती होती है।

कैसे बनती है LPG: घरों, होटल और रेस्तरों में इस्तेमाल की जाने वाली एनपीजी गैस बनाने की प्रक्रिया जटिल होती है। दरअसल जब कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल को साफ किया जाता है। तब यह गैस निकलती है, जिसे भारी दबाव डालकर लिक्विड गैस में तब्दील कर दिया जाता है। इसके बाद यह गैस एक जगह से दूसरी जगह ले जाने लायक हो जाती है और अंत में इसे सिलेंडर में भरा जाता है। भारत में जनवरी, 2026 तक लगभग 332.1 मिलियन घरेलू एलपीजी कनेक्शन हैं।

PNG

बड़े शहरों में रहने वाले लोग इस शब्द और इसके इस्तेमाल से अच्छे से वाकिफ होंगे। यह गैस भी घरों में खाना बनाने के काम आती है, लेकिन सिलेंडर के जरिये नहीं, बल्कि पाइप लाइन के रूप में। पीएनजी गैस सिलेंडर के मुकाबले सुरक्षित रहती है। इसका पूरा नाम (पाइप्ड नेचुरल गैस) है। पीएनजी गैस में मीथेन गैस (CH4) और हाइड्रोकार्बन मौजूद होते हैं। भारत में नवंबर 2025 तक लगभग 1.58 करोड़ PNG कनेक्शन हैं।

कैसे होती है आपूर्ती: पीएनजी गैस की आपूर्ती पॉलीइथाइलीन, कार्बन स्टील और गैल्वेनाइज्ड आयरन पाइप के जरिये की जाती है।

CNG

यह एक ऐसी गैस है, जो अन्य गैसों के मुकाबले प्रदूषण कम फैलाती है और पॉकेट फ्रेंडली यानी सस्ती भी होती है। इस गैस का पूरा नाम (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) है। सीएनजी में लगभग 93 प्रतिशत तक मीथेन पाया जाता है। इसके अलावा, इसमें थोड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन, प्रोपेन और एथेन भी होता है। सीएनजी का इस्तेमाल कार और भारी ट्रकों में आसानी से किया जा सकता है। गाड़ियों के लिए सीएनजी सबसे सुरक्षित है, जबकि एलएनजी अधिकतर भारी वाहनों में उपयोग होती है

सीएनजी की खासियत: यह किफायती होने के साथ-साथ गाड़ी के पुर्जों को लंबे समय तक जीवित रखता है। साथ ही इसके रखरखाव में लागत भी कम आती है।

LNG

एनएलजी गैस को (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) कहा जाता है। इस गैस को जहाज के द्वारा लाया जाता है। इस गैस को सात समंदर पार से सुरक्षित लाने के लिए -162°C तक ठंडा किया जाता है और जब यह गैस लिक्विड में बदल जाती है, तो इसका आयतन बेहद ही कम हो जाता है। जिसके बाद इसे जहाजों में स्टोर करके एक देश से दूसरे देश में लाया जाता है।

कहां होता है इस्तेमाल: एलएनजी का इस्तेमाल खाना पकाना, औद्योगिक प्रक्रियाओं, बिजली के उत्पादन के साथ-साथ रेलवे और जहाजों में किया जाता है।


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