नई दिल्ली:
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के बीच एक नया विवाद सामने आया है, जिसमें लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के मालिक संजीव गोयनका और टीम के कप्तान ऋषभ पंत के बीच हुई बातचीत ने तूल पकड़ लिया है। दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ हार के बाद मैदान पर हुई इस बातचीत की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए, जिसके बाद इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
इस पूरे मामले में आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी ने भी खुलकर अपनी राय रखी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर संजीव गोयनका के व्यवहार की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें ‘लूजर’, ‘जोकर’ और ‘जहरीला’ तक कह दिया। ललित मोदी ने लिखा कि अगर वह आज भी आईपीएल के चेयरमैन होते, तो गोयनका पर तुरंत प्रतिबंध लगा देते और उनसे टीम का मालिकाना हक छीन लेते।
दरअसल, दिल्ली कैपिटल्स से मिली हार के बाद मैदान पर संजीव गोयनका को कप्तान ऋषभ पंत और हेड कोच जस्टिन लैंगर से बात करते हुए देखा गया। यह दृश्य कैमरे में कैद हो गया और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। कुछ फैंस ने इसे 2024 के उस विवाद से जोड़ दिया, जब गोयनका ने केएल राहुल के साथ मैदान पर नाराजगी जाहिर की थी, जिसके चलते उन्हें भारी आलोचना झेलनी पड़ी थी।
हालांकि, इस बार लखनऊ सुपर जायंट्स फ्रेंचाइजी ने इस विवाद को शांत करने की कोशिश की। टीम की ओर से एक वीडियो जारी किया गया, जिसमें ऋषभ पंत को गोयनका से गले मिलते हुए और कोच जस्टिन लैंगर के चेहरे पर मुस्कान के साथ बातचीत करते हुए देखा गया। वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा गया कि “जो दिखता है, वह हमेशा सच नहीं होता” और इसे सामान्य पोस्ट-मैच बातचीत बताया गया।
इसके बावजूद सोशल मीडिया पर बहस थमने का नाम नहीं ले रही है। ललित मोदी ने अपने बयान में आगे कहा कि इस तरह के व्यवहार से आईपीएल की छवि को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने बीसीसीआई से अपील की कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि खेल की गरिमा बनी रहे।
दिलचस्प बात यह है कि ललित मोदी ने अपने बयान में ऋषभ पंत का समर्थन किया और संकेत दिया कि खिलाड़ियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि “फैंस और खिलाड़ी दोनों ऐसे व्यवहार को याद रखते हैं।”
फिलहाल, इस पूरे विवाद पर बीसीसीआई या संजीव गोयनका की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन आईपीएल जैसे बड़े मंच पर इस तरह के विवाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि फ्रेंचाइजी मालिकों और खिलाड़ियों के बीच मर्यादा और पेशेवर व्यवहार कितना जरूरी है।

