नई दिल्ली:
ईरान से भारत के लिए रवाना हुआ एक बड़ा तेल टैंकर अचानक अपना रास्ता बदलकर चीन की ओर मुड़ गया है, जिससे ऊर्जा बाजार और कूटनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। यह टैंकर ‘Ping Shun’ करीब 6 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर भारत के गुजरात स्थित वडीनार बंदरगाह पहुंचने वाला था, जहां इसकी डिलीवरी 4 अप्रैल को निर्धारित थी।
जहाज ट्रैकिंग डेटा देने वाली कंपनी Kpler के मुताबिक, यह टैंकर अब चीन के डोंगयिंग की ओर बढ़ रहा है। हालांकि शिपिंग इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि जहाज का डेस्टिनेशन संकेत (destination signal) अंतिम नहीं होता और इसे यात्रा के दौरान बदला जा सकता है।
7 साल बाद पहली खेप की थी उम्मीद
भारत ने मई 2019 के बाद से ईरान से कच्चे तेल का आयात बंद कर दिया था। यह फैसला अमेरिका द्वारा लगाए गए सख्त प्रतिबंधों के चलते लिया गया था। हाल ही में अमेरिका द्वारा समुद्र में फंसे ईरानी तेल कार्गो पर सीमित छूट दिए जाने के बाद उम्मीद जगी थी कि भारत को सात वर्षों में पहली बार ईरानी तेल की खेप मिलेगी।
‘पिंग शुन’ टैंकर ने अपनी यात्रा ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप से शुरू की थी, जो ईरान के कुल तेल निर्यात का लगभग 90% संभालता है। यह द्वीप रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
क्यों बदला जहाज का रास्ता?
टैंकर के अचानक चीन की ओर मुड़ने के पीछे कई संभावित कारण बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव, भुगतान संबंधी जटिलताएं, या खरीदार देश में अंतिम क्षणों में हुए बदलाव इसके पीछे हो सकते हैं। इसके अलावा, वैश्विक तेल बाजार में कीमतों और मांग के आधार पर भी ऐसे फैसले लिए जाते हैं।
हाल ही में डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान के साथ तनाव कम करने के प्रयास विफल रहते हैं, तो खार्ग द्वीप जैसी महत्वपूर्ण तेल सुविधाओं को निशाना बनाया जा सकता है। इस बयान के बाद क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है, जिसका असर तेल आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
भारत के लिए क्या मायने?
यदि यह टैंकर वास्तव में चीन पहुंचता है, तो भारत को ईरान से कच्चे तेल की आपूर्ति फिर से शुरू होने की उम्मीद को झटका लग सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए विविध स्रोतों पर निर्भर करता है, लेकिन ईरानी तेल को गुणवत्ता और कीमत के लिहाज से अहम माना जाता है।
फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि ‘पिंग शुन’ अपने गंतव्य में फिर बदलाव करता है या चीन में ही अपनी डिलीवरी पूरी करता है।

