फाइटर जेट क्रैश के बाद पायलट कैसे बचाते हैं अपनी जान? जानिए दुश्मन इलाके में जिंदा रहने की पूरी रणनीति

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CG City News

हाल ही में ईरानी सेना द्वारा अमेरिकी लड़ाकू विमान F-15E Strike Eagle को मार गिराए जाने की घटना के बाद यह सवाल फिर चर्चा में आ गया है कि युद्ध के दौरान यदि कोई फाइटर जेट क्रैश हो जाए तो पायलट अपनी जान कैसे बचाते हैं। इस घटना में दो पायलटों में से एक को सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि दूसरा अब भी लापता बताया जा रहा है।

इस बीच एक पूर्व वायुसेना पायलट और बचाव विशेषज्ञों ने बताया कि दुश्मन के इलाके में गिरने के बाद पायलट किन परिस्थितियों का सामना करते हैं और कैसे अपनी जान बचाते हैं।

प्रशिक्षण ही बनता है सबसे बड़ा सहारा

रिटायर्ड ब्रिगेडियर जनरल ह्यूस्टन कैंटवेल के अनुसार, फाइटर पायलटों को पहले से ही ऐसी परिस्थितियों के लिए तैयार किया जाता है। उन्हें SERE (Survival, Evasion, Resistance, Escape) यानी जीवित रहना, दुश्मन से बचना, प्रतिरोध करना और सुरक्षित निकलना जैसी विशेष ट्रेनिंग दी जाती है।

यह प्रशिक्षण पायलटों को मानसिक और शारीरिक रूप से इस काबिल बनाता है कि वे अचानक हुए हमले या विमान गिरने जैसी स्थिति में घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत सही निर्णय लें।

पैराशूट से उतरते समय भी खतरा

जब फाइटर जेट पर हमला होता है, तो पायलट इजेक्शन सीट की मदद से बाहर निकलते हैं और पैराशूट के जरिए जमीन पर उतरते हैं। लेकिन यह प्रक्रिया भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं होती। उतरते समय पैर, टखने या रीढ़ की हड्डी में चोट लगने का खतरा रहता है।

इसलिए पायलट को उतरते ही सबसे पहले अपनी शारीरिक स्थिति का आकलन करना होता है—क्या वह चल-फिर सकता है या नहीं।

जमीन पर उतरते ही बदल जाती है रणनीति

जैसे ही पायलट जमीन पर उतरता है, उसकी पहली प्राथमिकता होती है—अपनी लोकेशन समझना और सुरक्षित स्थान ढूंढना। यदि वह दुश्मन के इलाके में है, तो उसे तुरंत छिपने की जगह तलाशनी होती है, ताकि पकड़ा न जा सके।

इसके साथ ही पायलट अपने सर्वाइवल किट का इस्तेमाल करता है, जिसमें पानी, प्राथमिक चिकित्सा और संचार उपकरण शामिल होते हैं।

दुश्मन से बचना और संपर्क बनाए रखना जरूरी

पायलट लगातार यह कोशिश करता है कि वह दुश्मन की नजरों से बचा रहे। इसके लिए वह जंगल, पहाड़ या किसी सुनसान इलाके में छिप सकता है। साथ ही, वह अपने बचाव दल (Search and Rescue Team) से संपर्क करने की कोशिश करता है।

इस दौरान सेना के विशेष दल उसे खोजने के लिए सक्रिय रहते हैं। यह जानकारी पायलट को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखती है कि मदद रास्ते में है।

अंतिम लक्ष्य: सुरक्षित वापसी

विशेषज्ञों के मुताबिक, फाइटर जेट क्रैश के बाद पायलट का सबसे बड़ा लक्ष्य होता है—जिंदा रहना और सुरक्षित स्थान तक पहुंचना। वह हर संभव कोशिश करता है कि दुश्मन के हाथ न लगे और बचाव टीम के आने तक खुद को सुरक्षित रखे।

युद्ध के मैदान में यह पूरी प्रक्रिया बेहद चुनौतीपूर्ण होती है, लेकिन कठोर प्रशिक्षण और रणनीति के कारण कई पायलट ऐसी खतरनाक परिस्थितियों से भी सुरक्षित निकलने में सफल हो जाते हैं।


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