देश के दो अहम राज्यों तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है।

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक तमिलनाडु में सभी सीटों पर एक ही चरण में मतदान होगा, जबकि पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग से चुनावी प्रक्रिया की शुरुआत होगी।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या तमिलनाडु में एमके स्टालिन और बंगाल में ममता बनर्जी अपने-अपने गढ़ को बरकरार रख पाएंगे।

तमिलनाडु: एक चरण में सभी सीटों पर मतदान

तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में मतदान कराया जाएगा। राज्य में मुख्य मुकाबला सत्ताधारी डीएमके और विपक्षी एआईएडीएमके के बीच माना जा रहा है।

राज्य में 234 विधानसभा क्षेत्रों से कुल 4,023 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। कुल 5,73,43,291 मतदाता चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। गुरुवार को मतदान के बाद मतगणना 4 मई को होगी।

मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अपनी सरकार के कामकाज और सामाजिक योजनाओं के दम पर फिर से सत्ता में वापसी की कोशिश में हैं। वहीं एआईएडीएमके सत्ता में वापसी के लिए आक्रामक रणनीति बना रही है।

अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके (TVK) की एंट्री से चुनाव और दिलचस्प हो गया है, जिससे वोटों का समीकरण प्रभावित हो सकता है। भाजपा और कांग्रेस भी गठबंधन के जरिए अपनी-अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश में हैं।

पश्चिम बंगाल: चरणबद्ध मतदान की शुरुआत

पश्चिम बंगाल में चुनाव दो चरणों में होंगे, जिसमें पहले चरण की वोटिंग से चुनावी प्रक्रिया शुरू होगी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस लगातार तीसरी बार सत्ता बचाने की कोशिश में है।

विधानसभा चुनाव के पहले चरण के तहत गुरुवार को 16 जिलों की 152 सीटों पर अभूतपूर्व सुरक्षा में वोट पड़ेंगे। इनमें उत्तर बंगाल के आठ, दक्षिण बंगाल के तीन व जंगलमहल क्षेत्र के पांच जिले शामिल हैं।

भाजपा राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। कांग्रेस और वाम दल भी गठबंधन के जरिए चुनावी मैदान में हैं, जिससे मुकाबला बहुकोणीय हो गया है।

क्या कायम रहेंगे ‘गढ़’?

जनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, तमिलनाडु में डीएमके अभी मजबूत स्थिति में दिख रही है, लेकिन एआईएडीएमके और नए खिलाड़ियों से चुनौती मिल सकती है।

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पकड़ मजबूत मानी जाती है, लेकिन भाजपा की बढ़ती सक्रियता मुकाबले को कड़ा बना रही है।

राष्ट्रीय राजनीति पर असर

इन दोनों राज्यों के चुनाव नतीजे 2026 की राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी अहम संकेत देंगे। दक्षिण भारत में तमिलनाडु का परिणाम विपक्षी दलों की रणनीति को प्रभावित कर सकता है। वहीं बंगाल का नतीजा पूर्वी भारत में भाजपा और क्षेत्रीय दलों के बीच ताकत का संतुलन तय करेगा।