बंगाल और तमिलनाडु में गुरुवार को आजादी के बाद सर्वाधिक मतदान हुआ। बंगाल की 152 सीटों पर 92.54 प्रतिशत और तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर 84.69 प्रतिशत वोट पड़े। साथ ही बंगाल में छिटपुट हिंसा को छोड़कर पांच दशक बाद पहली बार हिंसामुक्त मतदान हुआ।

2021 के बंगाल चुनाव में पहले चरण में 81.16 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि तमिलनाडु में इससे पहले 2011 सर्वाधिक 78.29 प्रतिशत वोट पड़े थे और तब अन्नाद्रमुक की सरकार बनी थी।कोलकाता ब्यूरो के अनुसार, चुनावी हिंसा के लिए दशकों से कुख्यात बंगाल में इस बार बिल्कुल उलट नजारा दिखा।

पहले चरण में राज्य के 16 जिलों की 152 सीटों पर आमतौर पर शांतिपूर्ण तरीके से मतदान हुआ। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की लंबी प्रक्रिया के बाद हुए पहले चरण के मतदान को लेकर हरेक वर्ग का भारी उत्साह देखने को मिला। मतदान केंद्रों पर अभूतपूर्व सुरक्षा बंदोबस्त के बीच मतदाताओं ने वोट डाला।

महिलाओं की बड़ी भागीदारी

महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली। विभिन्न राज्यों से लौटे प्रवासी श्रमिकों ने भी अच्छी संख्या में मतदान किया। बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के अनुसार, विभिन्न मतदान केंद्रों में शाम छह बजे के बाद भी मतदाताओं की कतारें लगी थीं, इसलिए अंतिम आंकड़ा बढ़ सकता है।

पहले चरण का मतदान संपन्न होने के साथ ही भाजपा के सुवेंदु अधिकारी व दिलीप घोष, कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी, आम जनता उन्नयन पार्टी के हुमायूं कबीर व माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी से कांग्रेस के शंकर मालाकार समेत कई दिग्गजों की सियासी किस्मत ईवीएम में कैद हो गई।

चुनावी विश्लेषक बंपर वोटिंग के दो महत्वपूर्ण कारण एसआइआर का असर व सुरक्षा की भावना बता रहे हैं। उनका कहना है कि एसआइआर के बाद लोग वोट देने के प्रति और सजग हुए हैं, वहीं बहुतों ने सूची से नाम कटने की आशंका से मतदान किया है। चुनाव आयोग की ओर से इस बार की गई अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था से भी वोट प्रतिशत बढ़ा है।

मालूम हो कि पहले चरण के लिए केंद्रीय बलों की 2407 कंपनियां, 2193 क्विक रिस्पांस टीमें एवं 40,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। मतदान के दौरान कई जिलों में तापमान 40 डिग्री तक पहुंच गया था, लेकिन मतदाता धूप, तपिश व उमस को धता बताकर वोट डालने पहुंचे।

नहीं हुई कोई बड़ी अप्रिय घटना

मतदान के दौरान पिछले चुनावों की तरह कोई बड़ी अप्रिय घटना तो नहीं हुई, लेकिन कुछ छिटपुट घटनाएं जरूर हुईं। भाजपा प्रत्याशी सुवेंदु सरकार पर सिलीगुड़ी में भीड़ ने हमला किया और उन्होंने भागकर अपनी जान बचाई। बीरभूम जिले के दुबराजपुर विधानसभा क्षेत्र के खयरासोल में केंद्रीय बलों पर कुछ लोगों ने पथराव किया।

इसमें छह जवान घायल हो गए। पुलिस के वाहन में भी तोड़फोड़ की। दक्षिण दिनाजपुर जिले के कुमारगंज में भाजपा प्रत्याशी को पीटने के मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आसनसोल दक्षिण से भाजपा प्रत्याशी अग्निमित्रा पाल की गाड़ी पर कुछ लोगों ने हमला किया।

बीरभूम के लाभपुर व मालदा के चांचल इलाकों में भाजपा के पोलिंग एजेंट पर कुछ लोगों ने हमला किया। मुर्शिदाबाद जिले के नउदा विस क्षेत्र में बुधवार रात कुछ लोगों ने बमबाजी की। तृणमूल कांग्रेस सांसद अबू ताहेर खान ने इसके पीछे हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी के लोगों का हाथ बताया है।

घटना को लेकर गुरुवार सुबह तृणमूल व हुमायूं की पार्टी के समर्थकों में संघर्ष हुआ। आयोग ने घटना को लेकर स्थानीय प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। मामले में तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। मतदान के दौरान तबियत बिगड़ने के कारण चार लोगों की मौत हो गई।

तमिलनाडु के करूर जिले में सर्वाधिक मतदान

चेन्नई से प्रेट्र के अनुसार तमिलनाडु की 234 सीटों के लिए हुए चुनावों में 5.73 करोड़ मतदाताओं में से 84.69 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। राज्य का करूर जिला 91.86 प्रतिशत मतदान के साथ शीर्ष पर रहा। चेन्नई में 83.09 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई, जबकि मदुरै में यह 80.15 प्रतिशत थी। कोयंबटूर में 84.40 प्रतिशत और तिरुचिरापल्ली जिले में 85.04 प्रतिशत वोटिंग हुई।

चेन्नई की कोलाथुर विधानसभा सीट पर, जहां द्रमुक अध्यक्ष और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन चुनाव लड़ रहे हैं, शाम छह बजे तक 85.63 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। चेपक-तिरुवल्लिकेनी में 83.58 प्रतिशत वोटिंग हुई। उपमुख्यमंत्री और स्टालिन के बेटे उदयनिधि इस शहरी सीट से दूसरी बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। सेलम की एडापडी सीट पर 91.61 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

अन्नाद्रमुक के महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री एडापडी के. पलानीस्वामी अपनी पारंपरिक सीट से चुनाव लड़ रहे हैं और उन्हें द्रमुक से चुनौती मिल रही है। वहीं, अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कणगम (TVK) एक निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन कर रही है, क्योंकि टीवीके उम्मीदवार का पर्चा तकनीकी कारणों से रद कर दिया गया था।

बता दें कि एसआईआर के बाद मतदाताओं की संख्या अक्टूबर, 2025 में दर्ज 6.41 करोड़ से घटकर वर्तमान में 5.73 करोड़ रह गई है। लिहाजा 2021 के चुनावों में लगभग 6.29 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे, जो इस वर्ष के मुकाबले 56 लाख अधिक थे।

आजादी के बाद विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक मतदान

गुरुवार को बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान में आजादी के बाद सबसे अधिक 90 प्रतिशत से ज्यादा मतदान हुआ है। चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में अब तक इतना मतदान किसी भी चुनाव में नहीं हुआ है।

न तो विधानसभा और न ही लोकसभा। पूर्वोत्तर के छोटे राज्यों में मतदान प्रतिशत इसके आसपास रहा है, लेकिन बड़े राज्य इस आंकड़े को कभी नहीं छू पाए। 2018 के विधानसभा चुनाव में त्रिपुरा में 91.4 प्रतिशत मतदान हुआ था, जो पूर्वोत्तर के राज्यों में ऊंचे मतदान प्रतिशत के ट्रेंड को दर्शाता है।

जब-जब रिकार्ड मतदान हुआ, तब-तब बदली सत्ता

बंगाल के चुनावी इतिहास के साथ एक और दिलचस्प तथ्य जुड़ा है। यहां जब-जब रिकार्ड मतदान हुआ है, तब-तक राज्य में सत्ता बदली है। 1967, 1977 और 2011 में ऐसा हुआ है। 1967 में राज्य में 62.5 प्रतिशत मतदान हुआ और मतदाताओं ने कांग्रेस को सत्ता से हटा दिया। संयुक्त मोर्चा गठबंधन ने सरकार बनाई।

1977 में आपातकाल और राष्ट्रपति शासन की वजह से लोग गुस्से में थे और विधानसभा चुनाव में लोगों ने जमकर मतदान किया और वाम दल सत्ता में आए। हालांकि मतदान 55.2 प्रतिशत दर्ज किया गया था। चुनाव में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के आरोप भी लगे थे। 2011 विधानसभा चुनाव में रिकार्ड 84.5 प्रतिशत मतदान हुआ और 34 वर्षों के बाद वाम दल सत्ता से बाहर हुए व तृणमूल कांग्रेस ने सरकार बनाई थी।