


तकनीकी दक्षता से बम को किया निष्क्रिय
यह पुराना बम करीब 12 इंच लंबा था। इसका व्यास 6 इंच मापा गया। तकनीकी भाषा में इसे यूएक्सओ कहा जाता है। सेना की विशेषज्ञ टीम ने इसे अत्यंत सावधानी से हैंडल किया। बम को आबादी वाले क्षेत्र से हटाकर एक सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। वहां विशेषज्ञों ने नियंत्रित तरीके से बम को निष्क्रिय कर दिया। सेना की इस त्वरित और सटीक कार्रवाई से किसी भी तरह का नुकसान नहीं हुआ। एक संभावित बड़ा हादसा समय रहते टल गया।

सेना के अधिकारियों ने क्या-क्या कहा?
सेना के अधिकारियों के अनुसार, यह ऑपरेशन पूरी तरह पेशेवर ढंग से संपन्न हुआ। लेडो असम का एक ऐतिहासिक कस्बा है। यह अरुणाचल प्रदेश की सीमा के पास स्थित है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान प्रसिद्ध लेडो रोड की शुरुआत यहीं से हुई थी। यह सड़क भारत को म्यांमार के रास्ते चीन से जोड़ती थी। इसी ऐतिहासिक कारण से इस क्षेत्र में उस दौर के सैन्य अवशेष आज भी मिलते रहते हैं। पूर्वोत्तर के इन इलाकों में सेना की विशेष टीमें ऐसे खतरों को खत्म करने के लिए हमेशा अलर्ट रहती हैं।
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