मेरठ से सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां तीन लोगों की मौत को पहले जहरीली शराब का मामला समझा जा रहा था, लेकिन पुलिस जांच में जो खुलासा हुआ उसने सभी को हैरान कर दिया। अब यह स्पष्ट हो गया है कि यह कोई हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या थी, जिसमें मृतक की बहन और उसके प्रेमी ने मिलकर साजिश रची थी।
शराब में मिलाया गया जहर, नहीं थी जहरीली शराब
जांच में सामने आया है कि तीनों की मौत जहरीली शराब से नहीं, बल्कि शराब में अलग से जहर मिलाने के कारण हुई। पुलिस के अनुसार, अंकित की बहन अलका और उसके प्रेमी पवन ने पहले से योजना बनाकर शराब के पाउच में सिरिंज के जरिए जहर इंजेक्ट किया था।
शुक्रवार शाम अंकित एक 200 एमएल का देसी शराब का पाउच लेकर कस्बे की एक आटा चक्की पर पहुंचा, जहां पहले से मौजूद बाबूराम प्रजापति (65) और जितेंद्र कुमार (45) शराब पी रहे थे। तीनों ने मिलकर वही शराब पी ली। कुछ ही मिनटों में उनकी हालत बिगड़ गई और वे जमीन पर गिर पड़े। अस्पताल ले जाने पर तीनों को मृत घोषित कर दिया गया।
बेवजह गई दो लोगों की जान
इस पूरे मामले में सबसे दुखद पहलू यह है कि बाबूराम और जितेंद्र की मौत पूरी तरह से बेवजह हुई। आरोपियों का निशाना केवल अंकित था, लेकिन उसके साथ मौजूद दोनों अन्य लोगों ने भी वही शराब पी ली और उनकी जान चली गई।
संपत्ति और प्रेम प्रसंग बना हत्या की वजह
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस हत्याकांड के पीछे संपत्ति विवाद और प्रेम संबंध मुख्य कारण थे। अलका और पवन के बीच लंबे समय से संबंध थे, जिसका अंकित विरोध करता था। यही बात दोनों को नागवार गुजरती थी।
इसके अलावा, अंकित की मौत के बाद लगभग सात करोड़ रुपये की संपत्ति की अकेली वारिस अलका ही बनती। अंकित के माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका था और उसकी शादी भी टूट चुकी थी, जिससे वह अकेला वारिस था।
यूट्यूब से सीखी जहर मिलाने की तरकीब
पुलिस के अनुसार, पवन ने यूट्यूब पर यह देखा कि शराब में कौन सा जहर मिलाने से मौत हो सकती है। इसके बाद उसने अवैध रूप से बिक रही देसी शराब खरीदी और सिरिंज के जरिए उसमें जहर मिला दिया। बाद में वह पाउच घर में रख दिया गया, जिसे अंकित अपने साथ ले गया।
प्रशासन ने दी सफाई
जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह और एसएसपी अविनाश पांडे ने साफ किया कि यह जहरीली शराब का मामला नहीं है। आबकारी प्रयोगशाला की रिपोर्ट में मेथेनॉल और क्लोरल हाइड्रेट जैसे तत्व नहीं पाए गए। इससे पुष्टि हुई कि शराब खुद जहरीली नहीं थी, बल्कि उसमें अलग से जहर मिलाया गया था।
अवैध शराब कारोबार भी आया सामने
इस घटना के बाद इलाके में अवैध शराब बिक्री का मामला भी उजागर हुआ है। जांच में पता चला है कि ठेके से थोक में शराब लेकर उसे गांव और मोहल्लों में अवैध रूप से बेचा जा रहा था।
इस संबंध में ठेका संचालक मिंटू अहलावत पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है, हालांकि अभी तक तीनों मौतों में उसकी सीधी संलिप्तता के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं।
चुपचाप अंतिम संस्कार की थी योजना
पुलिस के मुताबिक, अलका और पवन की योजना थी कि अंकित की मौत को सामान्य शराब पीने से हुई घटना बताकर चुपचाप अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा। लेकिन मामला तब बिगड़ गया जब दो अन्य लोग भी उसी शराब को पी बैठे और उनकी भी मौत हो गई।
पुलिस ने किया गिरफ्तार
पुलिस ने दोनों आरोपियों अलका और पवन को हिरासत में ले लिया है। उनसे पूछताछ जारी है और मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।
यह घटना न सिर्फ एक परिवार के भीतर के विश्वासघात को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि लालच और अवैध संबंध किस हद तक इंसान को अपराध की ओर धकेल सकते हैं।

