वंदे मातरम् को चुनावी हथियार बना रही भाजपा: शिवपाल यादव

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सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने सोमवार को वंदे मातरम् पर चर्चा के दौरान कहा कि भाजपा राष्ट्र गीत को सम्मान देने के बजाय चुनावी हथियार बना रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा का यह राष्ट्रवाद नहीं, बल्कि चुनावी इंजीनियरिंग है। राष्ट्रभक्ति का ठेका किसी एक पार्टी के पास नहीं है और सपा भाजपा के तथाकथित राष्ट्रवाद से डरने वाली नहीं है।

सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने सोमवार को वंदे मातरम् पर चर्चा के दौरान कहा कि भाजपा राष्ट्र गीत को सम्मान देने के बजाय चुनावी हथियार बना रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा का यह राष्ट्रवाद नहीं, बल्कि चुनावी इंजीनियरिंग है। राष्ट्रभक्ति का ठेका किसी एक पार्टी के पास नहीं है और सपा भाजपा के तथाकथित राष्ट्रवाद से डरने वाली नहीं है।

शिवपाल ने कहा कि इतिहास गवाह है कि समाजवादियों और कांग्रेसियों ने वंदे मातरम् के लिए लाठियां खाईं और जेलें भरीं। उस दौर में वंदे मातरम् हमारी शक्ति था, जबकि आज सत्ता में बैठे लोग ऐसा व्यवहार कर रहे हैं मानो राष्ट्रभक्ति का कापीराइट केवल उनके पास है। देशभक्ति हृदय का विषय है, मंचों पर प्रदर्शन का नहीं।

उन्होंने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि वंदे मातरम् पर चर्चा इसलिए कराई जा रही है ताकि जनता खाद किल्लत जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सवाल न पूछे। सरकार स्कूलों में वंदे मातरम् अनिवार्य करने की बात कर रही है, लेकिन जिस बच्चे के पेट में रोटी नहीं है, उसके गले से इसके सुर कैसे निकलेंगे?

शिवपाल ने कहा कि सुजलाम सुफलाम का अर्थ पर्याप्त मात्रा में सिंचाई के लिए पानी और अच्छी फसल होता है, मगर प्रदेश में किसानों को डीएपी खाद तक नहीं मिल पा रही है। सरकार वंदे मातरम् की आड़ में एसआइआर का खेल खेल रही है। उनके मुताबिक, यह राष्ट्रवाद नहीं बल्कि चुनावी रणनीति है।

वंदे मातरम् पर राजनीति बंद करे भाजपा: आराधना मिश्रा

कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने वंदे मातरम् के मुद्दे पर भाजपा और योगी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् देश की आजादी का गीत है, जिसका देश के हर नागरिक से भावनात्मक जुड़ाव है, लेकिन भाजपा इसे राजनीति और विभाजन का माध्यम बना रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जिन संगठनों का आजादी के आंदोलन और संविधान निर्माण में कोई योगदान नहीं रहा, वही आज राष्ट्रप्रेम का प्रमाण पत्र बांट रहे हैं। मोना ने कहा कि वंदे मातरम् पहली बार कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था और 28 अक्टूबर 1937 के कांग्रेस अधिवेशन में इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया गया।

उन्होंने याद दिलाया कि वंदे मातरम् के शताब्दी वर्ष पर 30 दिसंबर 1976 को इंदिरा गांधी सरकार ने डाक टिकट भी जारी किया था। उन्होंने कहा कि 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश में वंदे मातरम् की अनिवार्यता को खुद भाजपा सरकार ने हटाया था, इसलिए आज भाजपा को पहले देश से माफी मांगनी चाहिए।


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