हिमाचल के कांगड़ा जिले के देहरा में एक ट्रक पलटने से 17 श्रद्धालु घायल हो गए। ये सभी पंजाब के मुक्तसर के मलोट से थे

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हिमाचल के कांगड़ा जिले के देहरा में एक ट्रक पलटने से 17 श्रद्धालु घायल हो गए। ये सभी पंजाब के मुक्तसर के मलोट से थे और ज्वाला जी के दर्शन कर घर लौट रहे थे।

 हिमाचल के कांगड़ा के पास देहरा से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आ रही है। यहां एक ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया। इस हादसे में ट्रक में सवार 17 श्रद्धालु घायल हो गए। ये सभी लोग पंजाब के मुक्तसर के मलोट के निवासी थे। सभी ज्वाला जी के दर्शन करने के पश्चात घर लौट रहे थे। तभी उनकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई।

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और राहत व बचाव कार्य शुरू किया। सभी घायलों को देहरा के सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। ऐसी जानकारी है कि इस हादसे में एक शख्स की हालत गंभीर बनी हुई है।

सात घायलों को टांडा मेडिकल कॉलेज किया रेफर

हादसे में कई लोग घायल हुए हैं। सात घायलों को टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। तीन देहरा अस्पताल में दाखिल हैं, जबकि 14 अन्य को हल्की चोट आई है।

हादसा लापरवाही के कारण हुआ। दरअसल, हर साल की तरह नवरात्र में माता ज्वालाजी में लंगर लगाने आए थे। श्रद्धालुओं के जत्थे में 15 साल के लड़कों से लेकर 75 साल के बुजुर्ग शामिल हैं। ये लोग मंगलवार को यहां पहुंचे थे। दो दिन लंगर लगाने के बाद लौट रहे थे। इसी बीच धवाला के पास मोड़ पर इनका ट्रक पलट गया।

ट्रक में फट्टे लगाकर बनाई हुई थी मंजिल

खास बात यह है कि ट्रक में फट्‌टे लगाकर एक ओर मंजिल बनाई गई थी। नीचे लंगर का सामान और ऊपर खुद लोग सवार थे। वाहन पलटा और क्रैश बैरियर से टकराकर रुक गया। ऊपर सवार कुछ लोग बैरियर पर गिरे तो कुछ झाड़ियों में। ट्रक पर फंसाए गए फट्‌टे भी कई लोगों के घायल होने की वजह बन गए।

हादसे में घायल हुए लाभ सिंह, अंकुश कुमार, मनोज कुमार, राकेश कुमार, करण, श्रीराम और केवल कृष्ण को टांडा मेडिकल कालेज रेफर कर दिया गया है। देहरा के एएसपी नवदीप सिंह के अनुसार हादसे की कारणों की जांच की जा रही है। फिलहाल लग रहा है कि गाड़ी किसी मकेनिकल फाल्ट की वजह से पलटी है। बाकी जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। नियमों के अनुसार इसमें कार्रवाई की जाएगी।

आधे से भी कम कीमत पर मिलते हैं मालवाहक

जानकारी के अनुसार 12 सीटर टैक्सी या सवारियो वाले वाहन तीन-चार दिन में 400 किलोमीटर के सफर के लिए 20 हजार से भी ज्यादा वसूलते हैं। इसलिए प्रति व्यक्ति इसका खर्च ज्यादा आता है।

जबकि इतने दिन और दूरी के लिए ट्रक का खर्च बेशक इससे कुछ ज्यादा पड़े, लेकिन इसमें 30-40 लोग राशन समेत सवार हो जाते हैं। लोग ज्यादा होने पर औसतन खर्च भी कहीं कम रह जाता है। ऐसे में लोग रुपये बचाने के लिए मानलवाहक को प्राथमिकता देते हैं। जबकि मालवाहक वाहनों में यात्रा करना गैरकानूनी और जानलेवा है, क्योंकि ये वाहन सवारी ढोने के लिए अधिकृत नहीं होते।

बीमा कंपनी क्लेम देने से कर सकती है इनकार

वाहन का उपयोग उसके पंजीकृत उद्देश्य (सिर्फ मालवाहक) के अलावा करने पर जुर्माना देना पड़ सकता है। इसे सीधे रूप से यात्रियों के जीवन को खतरे में डालने जैसा समझा जाता है।

कोई दुर्घटना होने की सूरत में बीमा कंपनी मुआवाजा देने से इनकार भी कर सकती है। मालवाहक यात्रियों के बैठने के लिए डिज़ाइन नहीं किए गए होते हैं। सुरक्षा बेल्ट, हैंडल और अन्य सुरक्षा सुविधाओं का अभाव होता है।


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