भारत विकसित देशों की पहली पसंद बन रहा है, खासकर कोविड के बाद चीन के विकल्प के रूप में। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि भारत ने 2014 से अब तक 8 मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, जिनमें 37 विकसित देश शामिल हैं। ईयू के साथ समझौता अमेरिका पर दबाव डालेगा और चीन के दबदबे को चुनौती देगा। यह भारत के लोकतंत्र और कुशल कार्यबल के कारण संभव हुआ है, जिससे ‘चीन प्लस वन’ रणनीति को बल मिल रहा है।
HighLights
- भारत ने 2014 से 8 मुक्त व्यापार समझौते किए हैं।
- ईयू समझौता चीन के वैश्विक व्यापार दबदबे को चुनौती देगा।
- विकसित देशों के लिए भारत चीन का मजबूत विकल्प बना।
भारत और ईयू के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर सहमति इस बात को साफ जाहिर कर रही है कि भारत विकसित देशों की पसंद बनता जा रहा है। खासकर कोविड काल के बाद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने से विकसित देशों को भारत में चीन का विकल्प दिखने लगा।
विकसित देशों का रुझान और आर्थिक समर्थन भारत की ओर बढ़ता गया। मंगलवार को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि हमने वर्ष 2014 से लेकर अब तक आठ मुक्त व्यापार समझौते किए। सभी विकसित देशों के साथ। अब तक 37 विकसित देशों के साथ भारत डील कर चुका है।
भारत ने 2014 से 8 मुक्त व्यापार समझौते किए
इनमें 27 यूरोपीय यूनियन (ईयू) के देश हैं तो स्विट्जरलैंड, नार्वे जैसे चार देश यूरोपीयन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (एफ्टा) के हैं। इसके अलावा आस्ट्रेलिया, यूएई, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड जैसे छह देश हैं। भारत और ईयू के व्यापार समझौते से अमेरिका पर परोक्ष रूप से दबाव पड़ेगा। वहीं वैश्विक बाजार पर चीन के दबदबे को भी चुनौती मिलेगी।
हालांकि चीन को चुनौती देने के लिए भारत को अपने मैन्यूफैक्चरिंग की लागत को कम करने और गुणवत्ता के साथ अपने उत्पादों की ब्रांडिंग करने की जरूरत है। लेकिन विकसित देशों में भारतीय पैठ से एक शुरुआत तो हो गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से ग्रीनलैंड को अपना हिस्सा बनाने की घोषणा और नाटो के अस्तित्व को नकारने के बाद पूरा ईयू दबाव में है। भारत पर भी अमेरिका ने 50 प्रतिशत का शुल्क लगा रखा है जिससे भारतीय निर्यात भी प्रभावित होने का खतरा है।
ईयू समझौता चीन के वैश्विक व्यापार दबदबे को चुनौती देगा
इस समझौते से अमेरिका को यह संदेश जाएगा कि दुनिया की दूसरी और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ईयू और भारत गोलबंदी कर रहे हैं।
ईयू के देश यह दिखाएंगे कि भारत उनके साथ खड़ा है, तो भारत अमेरिका में प्रभावित होने वाले निर्यात की भरपाई यूरोपीय बाजार से कर सकता है।
ईयू के फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों के पास टेक्नोलाजी है, तो भारत के पास कुशल युवा इंजीनियर्स और श्रमिक। इस समझौते से ईयू और भारत के बीच टेक्नोलाजी के एक नए सहयोग की भी उम्मीद की जा रही है।
अमेरिका हो या ईयू, किसी ने भी चीन पर बहुत भरोसा नहीं किया। लेकिन मजबूरन उन्हें चीन से ही माल खरीदना पड़ रहा है।
विकसित देशों के लिए भारत चीन का मजबूत विकल्प बना
व्यापार में भारत के आगे आने से निश्चित रूप से चीन प्लस वन की थ्योरी को अमली जामा पहनाने की शुरुआत हो गई है।
विकसित देशों की पसंद बनने के लिए भारत के लोकतंत्र की भी इसमें अहम भूमिका है। इसीलिए ईयू के साथ व्यापार समझौते पर बात तो वर्ष 2006 से चल रही थी, लेकिन वार्ता ने रफ्तार 2022 से पकड़ी।
ब्रिटेन ने भी वर्ष 2025 में व्यापार समझौता किया। यूरोप से लेकर हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते दबदबे ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया।
साइंस, टेक्नोलाजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स (स्टेम) से सालाना 20 लाख से अधिक ग्रेजुएट पैदा करने वाले एवं दुनिया में सबसे तेज गति से विकास करने वाला भारत इन विकसित देशों को चमकीला सितारा दिखने लगा है।


