उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में 3,000 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजनाओं को मंजूरी दे दी है, जो सेमीकंडक्टर कंपनियों को आकर्षित करने के लिए है। इसका उद्देश्य राज्य में उच्च स्तरीय विनिर्माण को बढ़ावा देना और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करना है।
उत्तर प्रदेश सरकर ने सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री और उससे संबंधित कंपनियों को राज्य में आकर्षित करने के लिए एक बड़ा ऐलान किया है। दरअसल, उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने मंगलवार को राज्य में 3,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक का निवेश करने को इच्छुक सेमीकंडक्टर कंपनियों को आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन योजनाओं को मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य उच्च स्तरीय विनिर्माण को बढ़ावा देना और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करना है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि मंत्रिपरिषद के समक्ष 14 प्रस्ताव रखे गए थे, जिनमें से 13 प्रपोजल को मंजूरी मिल गई है।
UP सरकार की सेमीकंडक्टर पॉलिसी
मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि जनवरी 2024 में शुरू की गई राज्य की सेमीकंडक्टर नीति में बड़े निवेश करने वाली कंपनियों के लिए अलग-अलग प्रोत्साहनों का प्रावधान है।
इनमें ब्याज सब्सिडी, कर्मचारी लागत प्रतिपूर्ति, 10 वर्षों के लिए जीएसटी छूट और एक दशक तक 2 रुपये प्रति यूनिट तक की बिजली दर सब्सिडी शामिल हैं।
उन्होंने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश में रहने वाले पेशेवरों के लिए ईपीएफ अंशदान की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति (2,000 रुपये प्रति माह की सीमा के साथ) और जल शुल्क में छूट भी प्रदान की जाएगी।
खन्ना ने कहा, “उद्देश्य सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रमुख वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करना और उत्तर प्रदेश को एक पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करना है।” उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में इस उद्योग पर अमेरिका, यूरोप, जापान और ताइवान का दबदबा है।
उत्तर प्रदेश सरकार में औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ने कहा कि राज्य में मल्टीनेशनल कंपनियों की रुचि बढ़ रही है और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) के लिए एसओपी को भी मंजूरी दे दी गई है।
उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में 21 कंपनियों ने पहले ही निवेश शुरू कर दिया है, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण रोजगार सृजित होगा।


