जिन महिलाओं को किडनी से जुड़ी कोई बीमारी है, उनके लिए प्रेग्नेंसी का दौर ‘विशेष सावधानी’ बरतने का होता है। यह समझना बेहद जरूरी है कि किडनी की बीमारी का असर सिर्फ मां की सेहत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह गर्भ में पल रहे नन्हे शिशु के विकास को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए, इस नाजुक दौर में सही जानकारी और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। आइए, फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग में कंसल्टेंट-नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. भानु मिश्रा से जानते हैं इस बारे में।

kidney disease

 

रिस्क फैक्टर्स को समझना जरूरी

हमारी किडनी शरीर से गंदगी को बाहर निकालने, ब्लड प्रेशर और फ्लूइड्स को कंट्रोल करने का काम करती है। अगर किडनी ठीक से काम नहीं कर रही है, तो प्रेग्नेंसी शरीर पर एक्स्ट्रा दबाव डाल सकती है।

डॉक्टर की मानें, तो किडनी की बीमारी से जूझ रही महिलाओं में इस समय कुछ समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है, जैसे:

  • हाई ब्लड प्रेशर
  • प्री-एक्लेमप्सिया
  • एनीमिया (खून की कमी)
  • समय से पहले डिलीवरी
  • बच्चे का वजन कम होना

यह जोखिम इस बात पर निर्भर करता है कि किडनी की बीमारी किस स्टेज पर है, ब्लड प्रेशर कितना है और यूरिन में प्रोटीन की मात्रा क्या है।

पहले से प्लानिंग करें

अगर आपको किडनी की बीमारी है, तो गर्भधारण करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना सबसे समझदारी भरा कदम है। एक नेफ्रोलॉजिस्ट और एक ओब्स्टेट्रिशियन आपकी किडनी की जांच करके यह बता सकते हैं कि इस समय गर्भधारण करना आपके लिए सुरक्षित है या नहीं।

दवाओं में बदलाव: किडनी और बीपी की कई दवाएं शिशु के लिए हानिकारक हो सकती हैं। इसलिए, डॉक्टर गर्भावस्था से पहले आपकी दवाइयां बदल सकते हैं ताकि बच्चे को कोई नुकसान न पहुंचे।

प्रेग्नेंसी के दौरान देखभाल

प्रेग्नेंसी के पूरे 9 महीनों के दौरान लगातार मॉनिटरिंग बहुत जरूरी है। इसमें शामिल हैं:

  • नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच
  • ब्लड और यूरिन टेस्ट
  • बच्चे के विकास को देखने के लिए सोनोग्राम

अगर आपको डायबिटीज है, तो ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखना, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करना और स्वस्थ खान-पान अपनाना कई समस्याओं को कम कर सकता है। कुछ मामलों में, गहन निगरानी के लिए अस्पताल में भर्ती होने की भी आवश्यकता पड़ सकती है।

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 डिलीवरी और उसके बाद

किडनी से जुड़ी समस्याओं में भी महिलाएं भी एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं। हालांकि, अगर कोई कॉम्प्लिकेशन आता है, तो डॉक्टर समय से पहले डिलीवरी का फैसला ले सकते हैं।

डिलीवरी के बाद भी किडनी की सेहत पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि गर्भावस्था कभी-कभी किडनी की सेहत में स्थायी गिरावट का कारण बन सकती है।

इमोशनल सपोर्ट और लाइफस्टाइल

किडनी की बीमारी के साथ प्रेग्नेंसी चैलेंजिंग हो सकती है। ऐसे समय में परिवार का सपोर्ट, काउंसलिंग और सही स्वास्थ्य शिक्षा बहुत मददगार साबित होती है। बेहतर नतीजों के लिए इन बातों का पालन करें:

  • स्वस्थ खान-पान की आदतें अपनाएं
  • धूम्रपान और शराब से पूरी तरह दूर रहें
  • डॉक्टर द्वारा दी गई सप्लीमेंट्स और दवाओं का नियमित सेवन करें।
  • नियमित चेक-अप कभी न छोड़ें।