गाजियाबाद-मेरठ आयकर टीम का बड़ा छापा, बिंदल्स पेपर-शुगर मिल ग्रुप पर 23 करोड़ कैश-जेवर बरामद

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गाजियाबाद-मेरठ आयकर टीमों ने दिल्ली, मुजफ्फरनगर और बिजनौर में बिंदल्स पेपर व शुगर मिल समूह पर छापा मारा। इस दौरान 20 करोड़ रुपये के जेवर और 3 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए, कुल 23 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति मिली। जांच में 50 करोड़ से अधिक की फर्जी खरीद व अघोषित बिक्री का खुलासा किया।

HighLights

  1. आयकर टीम ने बिंदल्स पेपर-शुगर मिल समूह पर छापा मारा।
  2. 20 करोड़ के जेवर, 3 करोड़ नकद सहित 23 करोड़ बरामद।
  3. 50 करोड़ से अधिक की फर्जी खरीद का खुलासा हुआ।

 आयकर विभाग की गाजियाबाद और मेरठ की टीम ने संयुक्त रूप से दिल्ली, मुजफ्फरनगर और बिजनौर में पेपर मिल एवं शुगर मिल पर छापा मारकर आयकर चोरी का पर्दाफाश किया है। इस दौरान टीम ने 20 करोड़ रुपये के जेवर और तीन करोड़ रुपये की नकदी बरामद की है।

शुगर यूनिट की भी कड़ी जांच की

आयकर विभाग की टीम ने इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 132 के तहत मेसर्स बिंदल्स पेपर्स मिल्स लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनियों को टारगेट करते हुए बड़े पैमाने पर सर्च और सीजर ऑपरेशन पूरा किया है। 18 मार्च से शुरू हुए ये छापे दिल्ली, मुजफ्फरनगर और बिजनौर में कई जगहों पर मारे गए।

ऑपरेशन के दौरान बिंदल्स डुप्लेक्स लिमिटेड, अग्रवाल डुप्लेक्स बोर्ड मिल्स लिमिटेड, टिहरी पल्प एंड पेपर मिल्स लिमिटेड, शाकुंभरी पल्प एंड पेपर मिल्स लिमिटेड और बिंदल इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर आयकर विभाग ने सर्च की। इसके अलावा बिजनौर के गांव चांगीपुर में ग्रुप की शुगर यूनिट की भी कड़ी जांच की गई।

50 करोड़ रुपये से ज्यादा की फर्जी खरीद

जांच के दौरान अधिकारियों ने तीन करोड़ रुपये से ज्यादा का बिना हिसाब का कैश और 20 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत की ज्वेलरी बरामद की। छापे के दौरान 50 से ज्यादा अचल प्राॅपर्टी के दस्तावेज़ मिले हैं। आयकर विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जांच में मिले सबूतों से पता चलता है कि खोई (गन्ने की बची हुई छाल) और दूसरे कच्चे माल की बिना हिसाब-किताब वाली खरीद की गई। 50 करोड़ रुपये से ज्यादा की फर्जी खरीद का भी पता चला है। विभाग को चीनी मिल के कामकाज में कागज की बिना हिसाब-किताब वाली बिक्री और संदिग्ध नकद भुगतानों के सबूत मिले हैं।

प्रमुख कर्मचारियों और निदेशकों के बयान दर्ज

इसका मकसद कथित तौर पर असली मुनाफा छिपाना था। बिंदल पेपर्स मिल लिमिटेड के आंतरिक अकाउंटेंट और पावर प्लांट के जनरल मैनेजर के आयकर विभाग द्वारा दर्ज किए गए बयानों से पता चला है कि समूह अपने कागज, बिजली और चीनी इकाइयों के लिए अलग-अलग हिसाब-किताब की किताबें रखने में नाकाम रहा।

सक्रिय तलाशी का चरण शनिवार को समाप्त हो गया है, अब विभाग जांच के चरण में है। वित्तीय अनियमितताओं की सीमा का और पता लगाने के लिए प्रमुख कर्मचारियों और निदेशकों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।


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