ईरान-इजरायल जंग पर कांग्रेस नेताओं का सरकार को समर्थन, बोले- ‘यह भारत का युद्ध नहीं’

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर और मनीष तिवारी ने ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध में भारत की विदेश नीति का समर्थन किया है। थरूर ने भारत की ‘चुप्पी’ को जिम्मेदार कूटनीति बताया, न कि नैतिक आत्मसमर्पण। तिवारी ने कहा कि ‘यह भारत का युद्ध नहीं है’ और देश को दूर से घटनाक्रम देखने के रुख का समर्थन किया। दोनों नेताओं ने भारत के कुशल प्रबंधन और राष्ट्रीय हितों की रक्षा पर जोर दिया।

HighLights

  1. थरूर ने भारत की ‘चुप्पी’ को जिम्मेदार कूटनीति बताया।
  2. मनीष तिवारी ने कहा ‘यह भारत का युद्ध नहीं है’।
  3. नेताओं ने भारत के कुशल प्रबंधन और राष्ट्रीय हितों की सराहना की।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर और मनीष तिवारी ने ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के बीच भारत की विदेश नीति का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया है। इन दोनों अनुभवी नेताओं ने इस स्थिति के कुशल प्रबंधन के लिए भारत की सराहना की और क्षेत्र में अपने हितों की रक्षा के महत्व पर जोर दिया।

शशि थरूर ने एक लेख में भारत की ‘चुप्पी’ को जिम्मेदार कूटनीति के रूप में सही ठहराया, ना कि नैतिक आत्मसमर्पण के रूप में जैसा कि कई लोगों ने दावा किया, जबकि मनीष तिवारी ने कहा कि यह ‘भारत का युद्ध नहीं है’ और भारत के दूर से घटनाक्रम को देखने के रुख का समर्थन किया।

थरूर ने क्या लिखा

विदेश मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष शशि थरूर ने जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्षता की नीति का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष के दावों को खारिज किया कि भारत शक्तिशाली अमेरिका-इजरायल धुरी की ओर झुक रहा है।

थरूर ने लेख में लिखा, “भारत की कूटनीति हमेशा सिद्धांत और व्यावहारिकता के बीच संतुलन बनाने के बारे में रही है। जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्षता की नीति नैतिक स्थिति लेने से इन्कार यह इस बात की स्वीकृति थी कि भारत की संप्रभुता और अस्तित्व शीत युद्ध की शत्रुताओं में उलझने से बचने पर निर्भर करता है।”

एक बढ़ते बहुध्रुवीय विश्व की वास्तविकताओं पर उन्होंने लिखा, “भारत ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ का अभ्यास करता है। ईरान पर युद्ध अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत न्यायसंगत नहीं है, लेकिन भारत की ‘चुप्पी’ उस युद्ध का समर्थन नहीं है, बल्कि यह इस बात की स्वीकृति है कि हमारे राष्ट्रीय हितों के लिए विवेक की आवश्यकता है, न कि दिखावे की।”

उन्होंने कहा, “एक सरकार का भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को पहचानना और सार्वजनिक रुख अपनाने से पहले भारत की अर्थव्यवस्था और रणनीतिक स्थिति के लिए परिणामों का वजन करना ‘नैतिक आत्मसमर्पण’ नहीं है। यह जिम्मेदार कूटनीति है।”

मनीष तिवारी ने केंद्र का जताया समर्थन

मनीष तिवारी ने एक कार्यक्रम में केंद्र सरकार का समर्थन कर बताया कि भारत ने हमेशा क्षेत्र में एक सीमांत खिलाड़ी के रूप में अपनी भूमिका निभाई है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि पश्चिम एशिया में कई युद्ध चल रहे हैं। इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच जो वास्तव में हो रहा है, वह केवल पश्चिम एशिया की गतिशीलता के बारे में नहीं है।

तिवारी ने कहा, “यह हमारा युद्ध नहीं है। हम हमेशा बड़े पश्चिम एशिया में सीमांत खिलाड़ी रहे हैं।” भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर उन्होंने कहा, “यदि हम सतर्क हैं, तो मुझे लगता है कि हम सही काम कर रहे हैं।”


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