वेदांता प्लांट हादसा: नवीन जिंदल ने जताया गहरा दुख, FIR में अनिल अग्रवाल का नाम शामिल करने पर उठाए सवाल, कहा – ‘जांच से पहले नामजद करना अनुचित

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रायपुर । सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट मामले ने अब एक बड़ा मोड़ ले लिया है। इस हादसे के बाद पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल का नाम शामिल किए जाने पर देश के प्रतिष्ठित उद्योगपति और जिंदल स्टील एंड पावर के चेयरमैन नवीन जिंदल ने कड़ा ऐतराज जताया है। नवीन जिंदल ने न केवल पुलिसिया कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, बल्कि देश के बड़े औद्योगिक संगठनों की चुप्पी पर भी तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।

हादसे पर जताया दुख लेकिन जांच प्रक्रिया पर उठाया सवाल

नवीन जिंदल ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की यह त्रासदी वाकई अत्यंत पीड़ादायक है और 20 से अधिक परिवारों का उजड़ जाना हृदयविदारक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीड़ितों को मुआवजा और आजीविका की सहायता देना प्रशासन की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि किसी भी जांच के नतीजे आने से पहले ही सीधे तौर पर अनिल अग्रवाल जैसे व्यक्तित्व को एफआईआर में नामजद कर दिया गया। जिंदल के अनुसार, जिस व्यक्ति की प्लांट के दैनिक संचालन में कोई सीधी भूमिका न हो, उसे बिना विस्तृत जांच के आरोपी बनाना ‘गंभीर चिंता का विषय’ है।

निजी क्षेत्र के खिलाफ दोहरे मानक का लगाया आरोप

नवीन जिंदल ने सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए तर्क दिया कि जब कभी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) या भारतीय रेलवे में बड़े हादसे होते हैं, तो क्या वहां के चेयरमैन को सीधे तौर पर नामजद किया जाता है? उन्होंने कहा कि जब सरकारी विभागों में ऐसा नहीं होता, तो निजी क्षेत्र के लिए अलग मानक क्यों अपनाए जा रहे हैं। जिंदल ने जोर देकर कहा कि विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए निवेशकों का सिस्टम पर भरोसा होना अनिवार्य है और इस तरह की कार्रवाई से देश में निवेश का माहौल प्रभावित हो सकता है।

देश के दिग्गज औद्योगिक संगठनों को भी आड़े हाथों लिया

इसी कड़ी में नवीन जिंदल ने देश के दिग्गज व्यापारिक संगठनों (CII, FICCI, ASSOCHAM) को टैग करते हुए उनकी भूमिका पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि, “इन संगठनों की जिम्मेदारी केवल सम्मेलनों और फाइलों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जब उचित प्रक्रिया को दरकिनार कर अनिल अग्रवाल जी के खिलाफ आधारहीन FIR दर्ज की गई और निवेशकों के भरोसे को खतरा पैदा हुआ, तब इन संगठनों की चुप्पी तटस्थता नहीं, बल्कि उनके मूल कर्तव्यों की विफलता है।” जिंदल ने जोर देकर कहा कि इन चैम्बर्स को न्याय के लिए खड़ा होना चाहिए, क्योंकि उनका अस्तित्व ही इसी उद्देश्य के लिए है।

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