कोरबा // धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के नाम पर शासन ने किसानों पर एक और नई अनिवार्यता लागू कर दी है। अब किसी भी सोसाइटी में धान बेचने पहुंचने से पहले गेट पर ही किसान को धान की गाड़ी के साथ खड़े होकर फोटो खिंचवाना और उसे सिस्टम में अपलोड करवाना अनिवार्य कर दिया गया है। पहले यह सभी मेनुवली आवक जावक पंजी में दर्ज करना होता था। अब सभी एप के माध्यम से आनलाइन होगा।
कोचियों और बिचौलियों पर नकेल कसने की कोशिश की जा रही है। इस प्रक्रिया के चलते किसान सुबह-सुबह ही धान से भरी गाड़ियां लेकर केंद्रों में पहुंचने को मजबूर हो रहे हैं। वहीं फोटो अपलोड और वेरिफिकेशन के फेर में एंट्री में देरी हो रही है। शासन का तर्क है कि इस कदम से किसानों की ऋण पुस्तिका का दुरुपयोग रोककर कोचियों और बिचौलियों पर नकेल कसी जाएगी तथा धान खरीदी में पारदर्शिता आएगी, लेकिन हकीकत यह है कि इस नए नियम ने समिति कर्मचारियों और किसानों दोनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। किसान या उनका नॉमिनी गाड़ी के साथ मौजूद न हों तो उनकी एंट्री ही रोक दी जाती है।
धान खरीदी में पारदर्शिता लेकर फोटो अपलोड करना अनिवार्य किया गया है। यह पहले मेनुवली किया जाता था —-घनश्याम कंवर जिला खाद्य अधिकारी कोरबा





