अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शिकागो क्षेत्र में नेशनल गार्ड सैनिकों को भेजने की डोनल्ड ट्रंप की मांग को खारिज कर दिया। यह फैसला इलिनोइस के अधिकारियों द्वारा दायर कानूनी चुनौती के बाद आया, जिसमें तैनाती पर रोक लगाने की मांग की गई थी। अदालत ने कहा कि सरकार कानूनों को लागू करने के लिए सेना को अनुमति देने वाले अधिकार के स्त्रोत की पहचान करने में विफल रही है। डेमोक्रेट्स ने ट्रंप के राजदूतों को वापस बुलाने के फैसले की भी आलोचना की है।
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की सैन्य तैनाती की मांग खारिज की
- इलिनोइस के अधिकारियों ने तैनाती के खिलाफ कानूनी चुनौती दी
- डेमोक्रेट्स ने राजदूतों को वापस बुलाने पर जताई चिंता
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को डोनल्ड ट्रंप को शिकागो क्षेत्र में नेशनल गार्ड सैनिकों को भेजने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया। रिपब्लिकन राष्ट्रपति कई डेमोक्रेटिक-शासित क्षेत्रों में घरेलू उद्देश्यों के लिए सेना के उपयोग का विस्तार कर रहे हैं। आलोचक इसे विरोधियों को दंडित करने और असहमति को दबाने का प्रयास बता रहे हैं।
न्यायाधीशों ने इलिनोइस के अधिकारियों और स्थानीय नेताओं द्वारा दायर एक कानूनी चुनौती में सैकड़ों नेशनल गार्ड सैनिकों की तैनाती पर रोक लगाने वाले न्यायाधीश के आदेश को फिलहाल बरकरार रखा। अमेरिकी न्याय विभाग ने मामले की सुनवाई के दौरान तैनाती की अनुमति देने की मांग की थी।
अदालत ने आदेश में क्या कहा?
अदालत के बहुमत ने एक अहस्ताक्षरित आदेश में कहा, ”इस प्रारंभिक चरण में, सरकार इलिनोइस में कानूनों को लागू करने के लिए सेना को अनुमति देने वाले अधिकार के स्त्रोत की पहचान करने में विफल रही है।”
आदेश में कहा गया है कि नेशनल गार्ड सैनिकों पर संघीय नियंत्रण लेने का राष्ट्रपति का अधिकार संभवत: केवल असाधारण परिस्थितियों में ही लागू होता है।
राजदूतों को वापस बुलाने के फैसले को वापस लें ट्रंप : डेमोक्रेट्स
डेमोक्रेट सीनेटरों ने बुधवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से 30 राजदूतों को वापस बुलाने के फैसले को पलटने का आग्रह किया। उन्होंने चेतावनी दी कि इस कदम से एक खतरनाक नेतृत्व का शून्य पैदा हो जाता है जो रूस और चीन जैसे विरोधियों को पहुंच बढ़ाने की अनुमति देता है।


