बिहार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब जनता ठान ले, तो परिवर्तन अवश्य होता है। 67.14% मतदान का आँकड़ा केवल संख्या नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की जागरूकता, जिम्मेदारी और विश्वास की कहानी है।
हर बूथ पर भीड़ यह संदेश दे रही थी कि लोकतंत्र केवल नेताओं का नहीं, बल्कि हर नागरिक का पर्व है। महिलाएँ और युवा आगे बढ़े, बुजुर्गों ने भी पीछे नहीं हटे। यह दृश्य बताता है कि जब देश के नागरिक अपने अधिकार के प्रति जागते हैं, तब राष्ट्र सशक्त होता है।
आइए, हम सब इस भावना को आगे बढ़ाएँ — हर चुनाव में भागीदारी करें, हर वोट को महत्व दें। यही सच्चा राष्ट्रधर्म है।





