सीएम साय ने इको-फ्रेंडली घोटुल की नक्काशी को सराहा, टाइगर ब्वॉय चेंदरू के परिजनों से भी की मुलाकात

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नारायणपुर के गढ़बेंगाल घोटुल का दौरा किया, जहां उन्होंने बस्तर की गौरवशाली परंपराओं और लोक-संस्कृति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शाई। उन्होंने घोटुल की अनूठी स्थापत्य कला का अवलोकन किया और आदिवासी विभूतियों से मुलाकात की। साय ने घोटुल को आदिवासी समाज का प्राचीन शैक्षणिक व संस्कार केंद्र बताया, जो नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ेगा और पर्यटकों को आदिवासी जीवनशैली से परिचित कराएगा। उन्होंने पारंपरिक व्यंजनों का भी स्वाद लिया।

  1. मुख्यमंत्री साय ने नारायणपुर के गढ़बेंगाल घोटुल का दौरा किया।
  2. बस्तर की गौरवशाली परंपराओं और लोक-संस्कृति के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाई।
  3. आदिवासी विभूतियों से मिले, पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लिया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने दो दिवसीय नारायणपुर प्रवास के दौरान आज ‘गढ़बेंगाल घोटुल’ पहुंचकर बस्तर की गौरवशाली परंपराओं और लोक-संस्कृति के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की। इस मौके पर पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि और ग्रामीणों के आत्मीय स्वागत के बीच मुख्यमंत्री साय स्वयं लोक-रंग में रंगे नजर आए।

मुख्यमंत्री साय ने घोटुल की अनूठी स्थापत्य कला का अवलोकन किया और बस्तर की विभूतियों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि घोटुल प्राचीन काल से ही आदिवासी समाज के लिए शैक्षणिक एवं संस्कार केंद्र रहा है। चेंद्रु पार्क के समीप स्थित यह आधुनिक घोटुल न केवल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ेगा, बल्कि देश-दुनिया के पर्यटकों को भी आदिवासी जीवनशैली और सामाजिक व्यवस्था से परिचित कराने का सशक्त माध्यम बनेगा। गढ़बेंगाल का यह घोटुल हमारी गौरवशाली विरासत को सहेजने का प्रतीक है। हमारी सरकार बस्तर की इस अनूठी संस्कृति, परंपरा और ज्ञान को संरक्षित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

मुख्यमंत्री साय ने घोटुल परिसर के लेय्योर एवं लेयोस्क कुरमा: युवाओं और युवतियों के लिए निर्मित कक्षों के साथ ही बिडार कुरमा: पारंपरिक वेशभूषा, प्राचीन वाद्ययंत्र एवं सांस्कृतिक सामग्रियों का संग्रह का निरीक्षण किया। इस दौरान ग्रामीणों की आग्रह पर मुख्यमंत्री साय ने सगा कुरमा में बस्तर के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेकर क्षेत्र की खान-पान संस्कृति का सम्मान किया। इस दौरान मुख्यमंत्री के भोजन में विशेष रूप से भोजन गाटो-भात, कोदो-भात, उड़िद दार, हिरुवा दार, जीरा भाजी, कनकी पेज, भाजी घिरोल फुल, चाटी भाजी, कांदा भाजी, मुनगा भाजी, इमली आमट, मड़िया पेज, टमाटर चटनी, चिला रोटी, रागी कुरमा, रागी केक, रागी लट्टू, रागी जलेबी परोसा गया।

इस दौरान वन मंत्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम, पद्म पंडीराम मंडावी, लोककलाकार बुटलू राम, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि मती संध्या पवार ने साथ बैठकर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लिया।

बस्तर की विभूतियों से आत्मीय भेंट

मुख्यमंत्री ने इस प्रवास को केवल एक औपचारिक दौरा न रखते हुए इसे एक आत्मीय मिलन का रूप दिया। क्षेत्र की महान प्रतिभाओं – वैद्यराज पद्म हेमचंद मांझी, पद्म पंडीराम मंडावी और सुप्रसिद्ध लोक-कलाकार बुटलू राम से भेंट कर उनका सम्मान किया। उन्होंने टाइगर ब्वॉय चेंदरू के परिवारजनो से भी मुलाकात की।

इको-फ्रेंडली घोटुल:

वन विभाग और पद्म पंडीराम मंडावी के मार्गदर्शन में निर्मित यह घोटुल पूर्णतः इको-फ्रेंडली (लकड़ी, मिट्टी और बांस) सामग्री से बना है। मुख्यमंत्री ने घोटुल के खंभों पर की गई बारीक नक्काशी की मुक्तकंठ से प्रशंसा की, जिसे स्वयं पद्म पंडीराम मंडावी ने उकेरा है। जिसमें नक्काशी, सांस्कृतिक जुड़ाव, विरासत का संरक्षण का प्रभावी प्रयास किया गया है।


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