‘मुंबई के विवियन रिचर्ड्स’ कहे जाने वाले अनिल गुरव का निधन, अधूरी रह गई एक प्रतिभाशाली क्रिकेटर की कहानी

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CG City News

मुंबई:

क्रिकेट जगत से एक भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है। मुंबई के उभरते हुए लेकिन अधूरे रह गए प्रतिभाशाली बल्लेबाज अनिल गुरव का मंगलवार को नालासोपारा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। गुरव को उनके शानदार बल्लेबाजी अंदाज के कारण दोस्तों और क्रिकेट सर्कल में ‘मुंबई के Vivian Richards’ के नाम से जाना जाता था।

अनिल गुरव, महान कोच Ramakant Achrekar के शुरुआती शिष्यों में शामिल थे। यही वह कोच हैं जिन्होंने Sachin Tendulkar और Vinod Kambli जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को तराशा। गुरव, सचिन और कांबली से कुछ साल सीनियर थे और उनके खेल को देखकर ही कई युवा क्रिकेटरों को प्रेरणा मिलती थी।

प्रतिभा की कोई कमी नहीं थी

अनिल गुरव को उनके दौर के सबसे प्रतिभाशाली बल्लेबाजों में गिना जाता था। कहा जाता है कि उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता, टाइमिंग और आत्मविश्वास का ऐसा मिश्रण था, जो सीधे वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज विवियन रिचर्ड्स की याद दिलाता था। कोच आचरेकर अक्सर युवा सचिन और कांबली को गुरव की बल्लेबाजी देखने के लिए नेट्स पर ले जाते थे, ताकि वे उनसे सीख सकें।

गुरव ने अंडर-16 और अंडर-19 स्तर पर क्रिकेट खेला और मुंबई के प्रसिद्ध क्लब ‘ससानियन क्रिकेट क्लब’ और ‘कामत मेमोरियल’ का प्रतिनिधित्व भी किया। हालांकि, इतनी प्रतिभा होने के बावजूद वे कभी सीनियर स्तर तक नहीं पहुंच पाए।

एक अधूरी कहानी

अनिल गुरव का क्रिकेट करियर कई कारणों से पटरी पर नहीं आ सका। कहा जाता है कि निजी जीवन की कुछ गलत पसंद और परिस्थितियों ने उनके करियर को प्रभावित किया। परिवार से जुड़ी कुछ परेशानियों और विवादों के चलते उनका ध्यान खेल से भटक गया।

इसके अलावा, धीरे-धीरे उन्हें शराब की लत लग गई, जिसने उनके करियर को और नुकसान पहुंचाया। जो खिलाड़ी कभी मुंबई क्रिकेट का बड़ा नाम बन सकता था, वह धीरे-धीरे खेल से दूर होता चला गया।

सचिन से जुड़ा एक खास किस्सा

अनिल गुरव से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी अक्सर क्रिकेट गलियारों में सुनने को मिलता है। कहा जाता है कि स्कूल के दिनों में गुरव ने अपना बल्ला सचिन तेंदुलकर को दिया था, जिससे सचिन ने अपने प्रतिस्पर्धी क्रिकेट का पहला शतक बनाया था। यह किस्सा इस बात को दर्शाता है कि गुरव न सिर्फ एक अच्छे खिलाड़ी थे, बल्कि अपने साथियों के लिए सहयोगी और प्रेरणास्रोत भी थे।

क्रिकेट जगत में शोक

गुरव के निधन से मुंबई क्रिकेट सर्कल में शोक की लहर है। कई पुराने खिलाड़ियों और कोचों ने उन्हें याद करते हुए कहा कि वह एक ऐसे खिलाड़ी थे, जिनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की पूरी क्षमता थी।

हालांकि, उनका जीवन इस बात की मिसाल भी बन गया कि केवल प्रतिभा ही सफलता की गारंटी नहीं होती, बल्कि अनुशासन, सही निर्णय और निरंतरता भी उतनी ही जरूरी होती है।

एक सीख छोड़ गए गुरव

अनिल गुरव की कहानी युवा खिलाड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है। वह बताते हैं कि खेल में सफलता के लिए सिर्फ हुनर ही नहीं, बल्कि सही दिशा और जीवनशैली भी जरूरी होती है।

उनका जाना क्रिकेट जगत के लिए एक भावुक क्षण है, लेकिन उनकी कहानी हमेशा याद दिलाएगी कि कैसे एक प्रतिभा अपने शिखर तक पहुंचने से पहले ही रास्ता भटक गई।


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