पसान (कोरबा)। पसान अवैध निर्माण बाल मजदूरी का मामला कोरबा जिले में प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है। तहसीलदार द्वारा जारी स्थगन आदेश के बावजूद भूमि पर निर्माण कार्य जारी है

राजस्व न्यायालय तहसीलदार पसान द्वारा जारी स्पष्ट स्थगन आदेश के बावजूद शासकीय भूमि पर निर्माण कार्य लगातार जारी है। मामला और गंभीर तब हो जाता है जब मौके पर नाबालिग बच्चों से मजदूरी कराए जाने का खुला प्रमाण सामने आया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पसान स्थित खसरा नंबर 408 एवं 412 (शासकीय भूमि) पर निर्माण कार्य पर रोक लगाने हेतु तहसीलदार पसान द्वारा आदेश जारी किया गया था। आदेश में साफ निर्देश दिए गए थे कि आगामी आदेश तक किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा। बावजूद इसके 26 दिसंबर 2025 को ली गई GPS Map Camera युक्त फोटो में स्थल पर निर्माण कार्य चलता हुआ स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
इससे पहले भी किया था आदेश की अवहेलना
इससे पूर्व भी स्थगन आदेश के बाद भी निर्माण कार्य जारी रखा गया था, तहसीलदार द्वारा कोई कार्यवाही नहीं करने से हौसला बुलंद हो गया और वह लगातार कानून की धज्जियाँ उड़ाते हुए बाल मजदूरों से काम कराया जा रहा है जिसका वीडियो, फोटो के साथ तहसीलदार पसान से कार्यवाही का निवेदन किया गया है

बाल मजदूरी कानून का सीधा उल्लंघन
निर्माण स्थल पर छोटे-छोटे बच्चों से मिट्टी खुदाई और निर्माण कार्य कराए जाने का दृश्य सामने आया है, जो बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम का गंभीर उल्लंघन है। यह अपराध गैर-जमानती श्रेणी में आता है, फिर भी अब तक न श्रम विभाग की कार्रवाई दिखी और न ही पुलिस की सक्रियता।

प्रशासनिक भूमिका पर उठे सवाल
स्थगन आदेश के बाद भी काम जारी रहने से राजस्व अमले और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माणकर्ता को संरक्षण नहीं होता, तो आदेश के बावजूद काम जारी रहना संभव नहीं है।
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सबसे चिंताजनक बात यह है कि बाल संरक्षण जैसे संवेदनशील विषय पर भी प्रशासन मौन बना हुआ है।
शिकायतकर्ता,ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि—
निर्माण कार्य को तत्काल सील और ध्वस्त किया जाए
निर्माणकर्ता पर FIR दर्ज की जाए
बाल मजदूरी के मामले में श्रम विभाग व बाल संरक्षण इकाई कार्रवाई करे
आदेश लागू न कराने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय जांच हो
लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला लोकायुक्त और उच्च न्यायालय तक ले जाया जाएगा।


