गौरेला पेंड्रा मरवाही जिला पौराणिक एवं धार्मिक स्थानों से परिपूर्ण है। जहां एक और दक्षिण में कारीआम वाले गणेश दादा, पश्चिम में मां नर्मदा की तराई में स्थित जालेश्वर महादेव पूर्व में मातिन दाई एवं बंजारी दाई तो उत्तर में श्री आदिशक्ति मां दुर्गा देवी मंदिर धनपुर, नागेश्वरी दाई और नाटेश्वरी दाई का पवित्र स्थान स्थित है।
गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले एवं छत्तीसगढ़ के बॉर्डर में स्थित ग्राम बरौर जहां साक्षात मां नाटेश्वरी देवी विराजी हुई है। ग्राम बरौर जिला मुख्यालय गौरेला पेंड्रा मरवाही से 50 किलोमीटर दूर मनेद्रगढ़ मार्ग में मरवाही से 10 किलोमीटर में स्थित है।
मां नाटेश्वरी देवी के बारे में गांव के लोग बताते हैं कि यह अत्यंत प्राचीन प्रतिमा है जो कितने साल पुरानी है किसी को पता नहीं है। काफी वर्षों पहले यह तालाब के किनारे मेंढ में पेड़ के नीचे रखी हुई थी। मां की प्रतिमा देखने में अत्यंत सुंदर है परंतु नाक कुछ दबी होने के कारण ।शुरू शुरू में ग्रामीण जन मां को नकटी देवी के नाम से संबोधित करने लगे बाद में ग्रामीणों ने अपनी गलती सुधार करते हुए मां की इस पावन मूर्ति का नाम नाटेश्वरी देवी रखकर उसे विधि पूर्वक विराजित कर दिया ।कालांतर में जन सहयोग से मां के मंदिर का निर्माण कर दिया गया तथा ग्रामीणों ने एक समिति बनाकर वहां पूजा अर्चना मनोकामना ज्योति कलश इत्यादि की स्थापना कर श्री सिद्ध पीठ नाटेश्वरी देवी की विधि विधान से पूजा अर्चना कर रहे हैं।
यहां दोनों नवरात्रि मनाए जाने के साथ प्रतिवर्ष 24 जनवरी से नवधा रामायण किए जाने की परंपरा है। गांव वाले तथा आसपास के लोग यहां भक्ति भाव के साथ मां नाटेश्वरी देवी की पूजा अर्चना करते हैं आज की स्थिति में बरौर गांव की पहचान मां नाटेश्वरी के नाम से है। जब कभी आप धनपुर आए तो यहां बराबर भी मां नाटेश्वरी के दर्शन करने अवश्य पधारे।

