अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद खाड़ी देशों में जीपीएस सिग्नल बाधित हुए। 24 घंटों के भीतर 1,100 से अधिक वाणिज्यिक जहाज प्रभावित हुए, जिससे उनकी लोकेशन गलत दिखने लगी।
HighLights
खाड़ी में जीपीएस सिग्नल बाधित, जहाजों की लोकेशन गलत ,होर्मुज जलडमरूमध्य में 1,100 से अधिक जहाज प्रभावित हुए , विमानों में भी जीपीएस सिग्नल लॉस की घटनाएं बढ़ीं
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर पहले हमलों के 24 घंटों के भीतर ही खाड़ी देशों में कॉमर्शियल जहाजों के नेविगेशन सिस्टम पूरी तरह से बिगड़ गए।
जीपीएस सिग्नल में बड़े पैमाने पर जैमिंग और स्पूफिंग की घटनाएं सामने आईं, जिससे जहाजों की लोकेशन गलत दिखाई देने लगी। कई जहाजों को एयरपोर्ट, ईरान की जमीन या यहां तक कि परमाणु संयंत्र पर खड़े दिखाया जा रहा था।
जहाजों की आवाजाही ठप
शिपिंग इंटेलिजेंस फर्म विंडवर्ड के अनुसार, 28 फरवरी को UAE, कतर, ओमान और ईरानी जल क्षेत्र में 1,100 से अधिक कॉमर्शियल जहाज प्रभावित हुए। होर्मुज जलडमरूमध्य में, जहां दुनिया का 20 प्रतिशत तेल और गैस निर्यात होता है, जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई।
जहाजों को वापस मुड़ना पड़ा या एआईएस (ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) बंद करना पड़ा, जिससे टक्कर की आशंका बढ़ गई।
जीपीएस छेड़छाड़ की घटनाएं
लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस ने युद्ध शुरू होने से 3 मार्च तक 655 जहाजों पर 1,735 जीपीएस छेड़छाड़ की घटनाएं दर्ज कीं, जो हर दिन दोगुनी होती गई।
जैमिंग मुख्य रूप से सैन्य उद्देश्य से की जा रही है, ताकि ड्रोन और मिसाइलों को भटकाया जा सके। हालांकि, इससे नागरिक जहाज और विमान बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
विंडवर्ड की वरिष्ठ विश्लेषक मिशेल वीसे बोक्मैन ने CNN से कहा, ‘आपको पता नहीं चलता कि जहाज कहां हैं। एआईएस का मुख्य उद्देश्य टक्कर से बचाव है, लेकिन जब जहाजों की लोकेशन जमीन पर या हजारों मील दूर दिखती है, तो यह बेहद खतरनाक है।’
विमानों के लिए बढ़ा खतरा
अंतरराष्ट्रीय एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अनुसार, 2021 से 2024 तक विमानों में जीपीएस सिग्नल लॉस की घटनाएं 220 प्रतिशत बढ़ीं। पायलटों को नकली ऊंचाई डेटा, फाल्स अलार्म और गलत लोकेशन का सामना करना पड़ रहा है। रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ नेविगेशन के निदेशक रामसे फराघर ने इसे इलेक्ट्रॉनिक फॉग’ करार दिया। यह समस्या युद्ध क्षेत्रों में आम हो गई है।


