ईरान के ड्रोन हमलों से कैसे बचाव कर रहा अमेरिका, क्या है C-RAM एयर डिफेंस सिस्टम?

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इराक की राजधानी बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर हुए ड्रोन और रॉकेट हमलों को C-RAM एयर डिफेंस सिस्टम ने सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया। ईरान द्वारा किए गए इन हमलों में अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था ने अधिकांश खतरों को हवा में ही नष्ट कर दिया।

इराक की राजधानी बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर मंगलवार की सुबह ड्रोन और रॉकेट हमले हुए है। इसमें C-RAM एयर डिफेंस ने हमलों को वक्त रहते रोक लिया। ईरान ने दूतावास को निशाना बनाया, लेकिन अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था ने ज्यादातर खतरों को हवा में ही नेस्तनाबूद कर दिया।

एक वीडियो में C-RAM की तेज आवाज और आग उगलते गोले साफ दिखाई दिए, जो आसमान में चमकते हुए ट्रेसर गोलियों की लकीरें बनाते हुए ईरान की ड्रोन या रॉकेट की तरफ बढ़ रहे थे।

एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि तीन ड्रोन और चार रॉकेट ने दूतावास पर हमला किया, जिसमें से कम से कम एक ड्रोन परिसर के अंदर गिरा। इससे पहले कुछ घंटे पहले भी रॉकेट हमले को हवा में ही रोक दिया गया था।

वीडियो में C-RAM की विशेष ऊंची आवाज़ सुनाई दी, जब 20mm M61A1 गैटलिंग गन 4,500 राउंड प्रति मिनट की रफ्तार से घूमी और उच्च-विस्फोटक इंसेंडियरी ट्रेसर गोले छोड़े। फिर ईरान की ओर आने वाले ड्रोन हवा में ही तबाह हो गए।

C-RAM कैसे काम करता है?

काउंटर-रॉकेट, आर्टिलरी और मोर्टार (C-RAM) प्रणाली अमेरिकी सेना की ओर से इराक युद्ध के दौरान विकसित की गई थी। यह मूल तौर से नौसेना की फेलैंक्स क्लोज-इन वेपन सिस्टम का जमीन पर इस्तेमाल होने वाला रूप है। इसका मुख्य काम सैन्य अड्डों, दूतावासों और अहम जगहों को रॉकेट, तोपखाने की गोलाबारी और मोर्टार से बचाना है।

यह रडार, फायर-कंट्रोल सॉफ्टवेयर और तेज रोटरी कैनन को जोड़कर काम करती है। वहीं AN/TPQ-36 फायरफाइंडर रडार और लाइटवेट काउंटर मोर्टार रडार जैसे सेंसर लॉन्च होते ही खतरे को भांप लेते हैं। कमांड सिस्टम खतरे की दिशा और प्रभाव बिंदु का अनुमान लगाता है और अगर जरूरी हो तो चेतावनी जारी करता है। फिर ऑटोमेटिक गन फायर करती है। ये इतना प्रभावी है कि पल भर में लक्ष्य को तबाह कर देता है।

मलबा भी आसमान में हो जाता है ‘छू-मंतर’

जमीन पर इस्तेमाल होने वाली इस डिफेंस सिस्टम में खास बात यह है कि इसके गोले खुद-ब-खुद नष्ट हो जाते हैं, ताकि गिरने वाले मलबे से नागरिकों को नुकसान न पहुंचे। इराक और अफगानिस्तान में अमेरिकी ठिकानों और दूतावासों पर इसे बड़े पैमाने पर तैनात किया गया है। यह अंतिम रक्षा कड़ी के रूप में काम करती है, यानी ऐसे वक्त में जब अन्य सिस्टम काम न करें।


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