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Thursday, April 16, 2026

“मुझे लगा था कि मेरा एनकाउंटर कर दिया जाएगा” — आज़म ख़ान ने रात में जेल स्थानांतरण के दौरान अपने भय का किया खुलासा।

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CG City News

समाजवादी पार्टी के नेता आज़म ख़ान ने कहा कि उन्हें जेल में बदली के दौरान एनकाउंटर का भय था। उन्होंने स्वयं यह खुलासा किया। उन्होंने कहा —
“एक रात तड़के लगभग साढ़े तीन बजे मुझे नींद से जगाया गया। मेरे और मेरे पुत्र के लिए जेल के बाहर अलग-अलग वाहन लाए गए। मैं जेल के भीतर यह सुन रहा था कि बाहर एनकाउंटर किए जा रहे हैं।”

मैंने अब्दुल्ला को गले लगाया और कहा — “बेटा, यदि मैं जीवित रहा तो हम फिर मिलेंगे, यदि नहीं तो स्वर्ग में भेंट होगी।”
मुझे यक़ीन नहीं था कि हम दोबारा मिल पाएंगे। वास्तव में, अक्टूबर 2023 में आज़म ख़ान और उनके पुत्र को अचानक अन्य जेलों में स्थानांतरित कर दिया गया था। आज़म को रामपुर से सीतापुर और अब्दुल्ला को हरदोई भेजा गया।

आज़म ने बताया —
“वह जेल मानो फाँसी के तख़्त के समान थी। मैंने अपने पुत्र अब्दुल्ला के साथ 23 माह एक ही कोठरी में बिताए। वहाँ खिड़की तक नहीं थी। मैं पूरी रात लाठी लेकर साँप और बिच्छुओं से अपनी रक्षा करता था। मेरी पत्नी जेल में गिर पड़ी थीं और उनका कॉलरबोन टूट गया था, वहीं उनका उपचार हुआ। उन्हें भी चोरी और डकैती के मामलों में फँसाया गया।”

यह बातें आज़म ख़ान ने राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के ‘दिल से’ कार्यक्रम में दी गई पॉडकास्ट मुलाक़ात के दौरान कहीं। उन्होंने अंत में एक शेर पढ़ा —
“इस दिल के टुकड़े हज़ार हुए, कोई यहाँ गिरा, कोई वहाँ गिरा।”

कपिल सिब्बल ने इस कार्यक्रम में आज़म ख़ान से लगभग एक घंटे तक बातचीत की।
यह रहे उस साक्षात्कार के प्रमुख अंश —


1. आपातकाल के समय मुझे देशद्रोह के आरोप में जेल भेजा गया था

आज़म ने आपातकाल की यादें साझा करते हुए कहा —
“मुझ पर देशद्रोह का आरोप लगाकर जेल में डाल दिया गया था। उस समय मैं एल.एल.एम. के अंतिम सत्र में था। मुझे भूमिगत कोठरी में रखा गया था, जहाँ कभी सुंदर डाकू को भी बंद किया गया था। नाश्ते में इतने सख़्त चने दिए जाते थे कि मेरा दाँत टूट गया।”


2. मुझे नींद से जगाकर कहा गया — तुम्हारी जेल बदली जा रही है

उन्होंने कहा —
“मेरी पत्नी तंज़ीन और पुत्र अब्दुल्ला को वर्ष 2017 में गिरफ़्तार किया गया। अब्दुल्ला और मुझे एक छोटी-सी कोठरी में रखा गया, जबकि मेरी पत्नी को महिला बैरक में भेज दिया गया। तीनों एक ही जेल में थे, इसलिए यह विश्वास था कि हम सुरक्षित हैं।
पर सरकार ने सोचा कि यदि हम तीनों साथ रहेंगे तो एक-दूसरे से संपर्क होता रहेगा, इसलिए हमें अलग-अलग जेलों में भेजने का निर्णय लिया गया। मेरी पत्नी वहीं रहीं, जबकि अब्दुल्ला और मुझे अन्य जेल में स्थानांतरित किया गया। तड़के साढ़े तीन बजे मुझे नींद से जगाया गया।”


3. अपने बेटे को जीवित देखकर मुझे राहत मिली

“मेरे लिए अलग वाहन था और अब्दुल्ला के लिए अलग। मैंने अधिकारियों से कहा — ‘कृपया मेरे बेटे को मेरे साथ भेज दीजिए, उसे अलग क्यों ले जा रहे हैं?’ उन्होंने कहा — ‘आपकी जेल और उसकी जेल अलग हैं, रास्ते में या वहाँ पहुँचने पर सब स्पष्ट हो जाएगा।’
उस क्षण मुझे भय हुआ। अब्दुल्ला के जीवित होने की सूचना मिलने तक वह रात और अगला दिन मेरे लिए अत्यंत कठिन रहा।”


4. मेरा एकमात्र अपराध यह था कि मैं रिक्शाचालकों के बच्चों को डॉक्टर बनाना चाहता था

“छापे के समय मेरे घर में दो फुट तक पानी भरा था और बिजली भी नहीं थी। अधिकारियों ने नोट गिनने की मशीनें, जौहरी और अर्धसैनिक बलों को बुला लिया। मेरे पास केवल ₹500 थे, मेरे पुत्र के पास ₹11,000 और मेरी पत्नी के पास 100 ग्राम सोना। फिर भी हमें चोर कहा गया।

मेरा अपराध यह है कि मैं बीड़ी बनाने वालों और रिक्शाचालकों के बच्चों को इंजीनियर और डॉक्टर बनाना चाहता था। जोहर विश्वविद्यालय का सपना सर सैयद अहमद ख़ान से प्रेरित था। उन्होंने जिस ‘अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय’ का निर्माण किया, मैं वही सपना पूरा करना चाहता था। उन्हें ‘सर’ की उपाधि मिली, और मुझे यह नारा — ‘जो कोई आज़म का सिर लाएगा, उसे रामभक्त कहा जाएगा।’


5. मैं मंत्री था, इसलिए राजनीति ने मुझे अपराधी बना दिया

“मैं मंत्री था, इसीलिए राजनीति ने मुझे अपराधी घोषित कर दिया। आज की राजनीति वोट माँगने की नहीं, बल्कि छीनने की है। मेरे परिजनों, सहयोगियों, यहाँ तक कि मेरी वृद्ध माँ और बहन पर भी मुक़दमे दर्ज किए गए। मेरा विवाह भवन तोड़ दिया गया।

हर विवाह समारोह में पुलिस आकर घोषणा करती — ‘तिजोरी चोरी हो गई है।’ इससे मेहमान डरकर भाग जाते।
अब केवल न्यायालय ही हमारे रक्षक हैं। यदि न्यायालय असफल हुए, तो लोकतंत्र ढह जाएगा। मेरी प्रतिष्ठा निर्दोष है, पर मेरा अपराध यह है कि मैंने अपने लोगों को शिक्षित और सशक्त बनाने का प्रयास किया।”


6. 94 मामलों में ज़मानत, पर हर बार नए धाराएँ जोड़ दी जाती हैं

“मेरे विरुद्ध लगभग 94 मुक़दमे दर्ज हैं। मुझे सभी में ज़मानत मिल चुकी है, लेकिन जैसे ही ज़मानत मिलती है, पुलिस नई धाराएँ जोड़कर मुझे जेल में रखती है। एफआईआर वर्ष 2019 की है, पर आरोप 2016 के लगाए गए हैं। कहा गया कि मेरे लोगों ने किसी का घर गिराया, जबकि वह भूमि सरकार ने ‘आसरा योजना’ के तहत अधिग्रहित कर गरीबों के लिए भवन बनाया।”


7. पायल और मुर्गियाँ चुराने तक के आरोप

“एक एफआईआर में मुझ पर पायल और मुर्गियाँ चुराने का भी आरोप लगाया गया। बाद में जब बॉक्स खोले गए, तो उनमें सस्ती सड़क किनारे की वस्तुएँ निकलीं।
कभी कहा गया कि विश्वविद्यालय में नगर पालिका की मशीन है — जाँच में स्वयं अध्यक्ष ने कहा कि ‘वह मशीन हमारी नहीं।’
एक अन्य मामले में मुझ पर शराब की दुकान में डकैती डालकर ₹16,900 चोरी करने का आरोप लगाया गया, उसी में मेरी पत्नी को भी फँसाया गया।”


1 वर्ष 11 माह बाद रिहाई

23 सितंबर को, एक वर्ष 11 माह बाद, आज़म ख़ान सीतापुर जेल से रिहा हुए।
उनके दोनों पुत्र, अदीब और अब्दुल्ला, स्वागत के लिए उपस्थित थे। वे 100 वाहनों के क़ाफ़िले के साथ रामपुर पहुँचे।

18 सितंबर को उच्च न्यायालय ने उन्हें बीयर बार से संबंधित एक मामले में ज़मानत दी — यह उनका अंतिम मामला था जिसमें ज़मानत मिली।
हालाँकि, रिहाई के तुरंत बाद पुलिस ने ‘शत्रु संपत्ति’ प्रकरण में नई धाराएँ जोड़ दीं।
20 सितंबर को रामपुर की अदालत ने वे धाराएँ निरस्त कर दीं और उनकी रिहाई का मार्ग प्रशस्त हुआ।
आज़म ख़ान पर कुल 104 मुक़दमे दर्ज हैं।


अखिलेश यादव की भेंट

9 अक्टूबर को अखिलेश यादव रामपुर पहुँचे और आज़म ख़ान से मुलाक़ात की। दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में लगभग दो घंटे वार्ता हुई। इस दौरान आज़म की पत्नी और पुत्र उपस्थित नहीं थे।

निकलते समय अखिलेश ने कहा —
“आज़म साहब बहुत वरिष्ठ नेता हैं। उनका गहरा प्रभाव सदैव हमारे ऊपर रहा है। वे समाजवादी पार्टी के आधारस्तंभ हैं।
भारतीय जनता पार्टी, आज़म परिवार के विरुद्ध मुक़दमे दर्ज कर विश्व रिकॉर्ड बनाना चाहती है।
यह एक बड़ी लड़ाई है, और हम सब मिलकर इसे लड़ेंगे।”


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