कोरबा / पसान // जब खाद्य सुरक्षा कानून बना तब छत्तीसगढ़ ने एक आदर्श पीडीएस सिस्टम दिया. पूरे देश में छत्तीसगढ़ पहला राज्य है जिसने सार्वजनिक राशन वितरण प्रणाली को अनिवार्य किया और 1 रुपये किलो में गरीबों को 35 किलो चावल देना शुरू किया. कुछ दिनों बाद चावल के साथ ही शक्कर, नमक और चना भी दिया जाने लगा. जिससे काफी हद तक गरीब परिवार की जरूरतें पूरी होने लगी. पर कोरबा जिला के पसान में सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना को यहाँ राशन वितरण करने वाली समूह के द्वारा पलीता लगाया जा रहा है ,उनके द्वारा गरीब परिवार के हक का निवाला में छेद किया जा रहा है जिससे गरीब परिवारों के सामने जीवन जीने के लिए चावल के लिए दुकानों से ऊची दर से चावल खरीदने की मजबूरी हो जाती हैं ,जिम्मेदार खाद्य, आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के विभाग के मुताबिक हर माह आबंटित चावल का 99.99 फीसद हिस्सा लाभार्थियों को बांटा जा चुका है। लेकिन क्या पसान के राशन दुकान से यह राशन वाकई गरीबी रेखा से नीचे और अंत्योदय वर्ग के राशन कार्ड धारियों के घर पहुंचा है। अगर ऐसा होता तो मजदूरी कर आजीविका चलाने वाली पचास साल की रमा (बदला हुआ नाम) के घर भी सरकार की तरफ से दिया जाने वाले सस्ते दर का चना, चावल और चीनी मौजूद होता और उसकी जिंदगी थोड़ी आसान होती।
वितरण केंद्र पसान में चना वितरण में अनियमितता , खुला चना का वितरण ,मात्रा में भी कटौती

सभी राशन वितरण केन्द्रों में चना वितरण के लिए सील बंद चना का पैकेट आया है , परंतु पसान के वितरक ने राशन दुकान में नवम्बर ,दिसंबर के लिए आए चना को वितरण ना कर ,खराब चना को इस माह वितरण के लिए पैकेट में आए चना को पैकेट से खोलकर दोनों चना को मिलाकर खुला तौलकर वितरण किया जा रहा है ,लेकिन उन्होंने यह फार्मूला सिर्फ ग्रामीणों के साथ ही अपनाया है , लोकल पसान बस्ती में पैकेट बंद चना दिया जा रहा है ,जिससे वह लोगो की शिकायतों से बचे रहे , यहां सवाल उठाना लाज़मी होगा की आखिर नवम्बर दिसंबर का चना क्यो नही वितरण हुआ था ,
नवम्बर दिसंबर को जोड़ दिया जाए तो पसान के समस्त राशनकार्ड धारकों को 8 पैकेट चना मिलना चाहिए लेकिन यहाँ सिर्फ किसी को 2 पैकेट किसी को 4 पैकेट चना दिया जा रहा है
हितग्राहियों को हर माह नही दिया जाता पूरा राशन
कुछ हितग्राहियों ने बताया की वितरक द्वारा राशन लेने जाने पर चावल की मात्रा पूरा नही दिया जाता हैं , उन्होंने बताया की 35 किलो चावल के जगह 20 kg चावल स्टॉक कम होने का हवाला देकर दिया जाता है ,इसकी पुष्टि वितरक के द्वारा बड़े दिलेरी से राशनकार्ड में चावल की मात्रा दर्ज करने से होती है

चावल के हेरफेर को इस राशनकार्ड से आसानी से समझा जा सकता है ,35 किलो प्रतिमाह मिलने वाले चावल में ,50 ,40 , 00 ,00,35 , क्यो दर्ज है ,सरकार हर माह चावल भेज रही है फिर हितग्राहियों के राशनकार्ड में ये मात्रा दर्ज कैसे ,यह भी एक जाँच का विषय है
फर्जी यूनिट संख्या का खेल , जाँच हुई तो खुलेगा पोल
पसान के हितग्राहियों में फर्जी यूनिट संख्या का खेल चल रहा है , जिस उपभोक्ताओं के घर में चार यूनिट है उनके राशनकार्ड में आठ यूनिट दर्ज कराकर कितने महीनों से शासन की योजनाओं का पलीता लगाते हुए शासन के खजाने में डाका डाला जा रहा है ,अगर इन राशनकार्ड की जांच की जाती है तो पूरा पोल खुलने की उम्मीद है



