वनपरिक्षेत्र पसान में पौधारोपण और बोरवेल खनन के मामले में हुई जांच ,पाई गयी कमियां जिम्मेदारों पर होगी कार्यवाही

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कोरबा //   कोरबा जिले के कटघोरा वनमंडल अंतर्गत पसान परिक्षेत्र में पिछले वर्षों में मनमाने ढंग से कराए गए पौधारोपण और बोरवेल का मामला अब संबंधितों के लिए गले की हड्डी बन गया है। चौतरफा दबाव पड़ने के बाद आखिरकार इसमें जांच बैठाई गई। यह प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। अपुस्ट जानकारी के अनुसार पूरी व्यवस्था को गड्डमड बनाने वालो पर सख्त कार्यवाही हो सकती हैं।
जानकारी के अनुसार कोरबा जिले में वन विभाग के द्वारा कराए जाने वाले अनेक कार्य पिछले वर्षों में सुर्खियों में रहे। वर्ष 2024 की समाप्ति से पहले पसान वन परिक्षेत्र से जुड़े हुए ऐसे ही एक मामले की जांच पूरी कर ली गई हैं। उसकी रिपोर्ट भी तैयार हो गई हैं। इसके साथ अब अगली कार्यवाही प्रतीक्षित है। अपुस्ट जानकारी के अनुसार पिछले वर्षों में पसान परिक्षेत्र में सरकारी योजना के अंतर्गत सीपतपारा पिपरिया में वृहद पौधारोपण कराया गया था। सागौर सहित कई प्रजाति के पौधे यहां लगाए गए।
आरोप हैं की प्रावधान के तहत हर हाल में इन्हें सार-संभाल करते हुए बचाना था ताकि इनका व्यवसायिक उपयोग सुनिश्चित हो सके। परंतु जिन्हें निगरानी और संरक्षण का जिम्मा दिया गया उन्होंने ही लापरवाही बरती। जिससे 80 फीसदी पौधे खराब हो गए। इसे अपने आप में गंभीर माना गया। इस पर न केवल सवाल खड़े हुए बल्कि जांच की मांग तेज हुई।
उक्तानुसार अधिकारियों ने तत्परता दिखाई। जानकारी के अनुसार सीपतपारा पिपरिया में जो काम कराया गया उसमें पारदर्शिता के अलावा कई चीजों का अभाव रहा। पौधों को अनुकूल वातावरण नहीं मिल सका और वे बहुत जल्द समाप्त हो गए। इस प्रकरण में कुल मिलाकर वन विभाग और सरकार की धन राशि जाया हुई। इसके अलावा पौधारोपण कार्यक्रम से वह उद्देश्य साबित नहीं हो सका, जिसकी पूर्ति की जानी थी। बताया गया कि इसी परिक्षेत्र में मनमाने तरीके से 21 बोरवेल का खनन भी करवाया गया और भारी-भरकम राशि खर्च की गई। यह काम तब हुआ जबकि बोरवेल को संचालित करने के लिए बिजली की व्यवस्था ही नहीं थी। आनन-फानन में ट्रायल के तौर पर चार दिन के लिए जनरेटर की व्यवस्था की गई और उसके बाद सबकुछ गड्डमड हो गया।
* राशि की होगी रिकवरी
पाली वन क्षेत्र एसडीओ चंद्रकांत टिकरिया ने जानकारी देते हुए बताया की “पसान वन परिक्षेत्र से संबंधित मामलों को लेकर वन विभाग के द्वारा जांच कराई गई है। इसमें कई बिंदुओं को शामिल किया गया। जांच के दौरान कई तरह की कमियां स्पष्ट रूप से पाई गई। जांच रिपोर्ट प्राप्त हो गई है जिसे फिलहाल डिस्क्लोज नहीं किया जा सकता। लेकिन इतना तय है कि इस मामले में जवाबदेही भी तय होगी और राशि की रिकवरी संबंधितों से होगी।”

 


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