भारतीय जहाजों को होर्मुज से निकलने की अनुमति! ईरान ने दिया सुरक्षित मार्ग का आश्वासन

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारतीय अधिकारियों ने बताया कि भारतीय ध्वज वाले टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति मिल गई है। दूसरी तरफ ईरानी अधिकारियों ने इस तरह के किसी भी समझौते से इनकार किया है।

  1. होर्मुज में भारतीय जहाजों के सुरक्षित आवागमन पर ईरान से वार्ता जारी
  2. भारतीय अधिकारियों ने बताया, विदेश मंत्रियों की वार्ता के बाद ईरान ने दिया सुरक्षित मार्ग का आश्वासन
  3. ईरान ने कहा-किसी को नहीं दी गई है इस तरह की अनुमति, मामला संवेदनशील

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारतीय अधिकारियों ने बताया कि भारतीय ध्वज वाले टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति मिल गई है।

दूसरी तरफ ईरानी अधिकारियों ने इस तरह के किसी भी समझौते से इनकार किया है। ईरानी अधिकारियों ने इसे संवेदनशील मामला करार दिया है।

रॉयटर के अनुसार, गुरुवार को सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर एक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते मुंबई पहुंचा। लाइबेरिया के ध्वज वाला यह जहाज ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से पश्चिम एशिया से भारत पहुंचने वाला पहला कच्चा तेल वाहक है। विदेशी ध्वज वाले दो अन्य जहाज हाल ही में होर्मुज जलमार्ग से गुजर चुके हैं और इन्हें भी भारत पहुंचना है।

सूत्रों ने बताया कि विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद ईरान ने मंगलवार देर रात भारतीय ध्वज वाले जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग का आश्वासन दिया था।

वैसे, जयशंकर और अराघची के बीच हुई वार्ता के बाद जारी बयान में ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि फारस की खाड़ी में जहाजों के लिए उत्पन्न असुरक्षा और समस्याओं के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। दोनों पक्षों में से किसी ने भी भारतीय जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग की अनुमति देने पर किसी समझौते का उल्लेख नहीं किया।

जागरण ब्यूरो के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर भारत लगातार ईरान के साथ संपर्क में है। सरकार ने कहा है कि इस संवेदनशील स्थिति में भारत अपने समुद्री हितों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर लगातार संपर्क बनाए हुए है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को कहा कि पिछले कुछ दिनों में विदेश मंत्री जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष के बीच तीन बार बातचीत हुई है। अंतिम बातचीत में शिपिंग की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। इसके अलावा, अभी मेरे लिए कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

बाद में जायसवाल ने कहा कि भारत अपने जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और इस विषय पर संबंधित देशों के साथ संपर्क में है।

हालांकि, तेहरान के अधिकारियों का कहना है कि ईरान ने किसी भी देश को विशेष अनुमति नहीं दी है और समुद्री मार्ग से गुजरने के नियम सभी के लिए समान हैं। यह मार्ग भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

भारत अपनी जरूरत का 86 प्रतिशत तेल और 60 प्रतिशत गैस बाहर से आयात करता है और इसका एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है।

पश्चिम एशिया युद्ध की वजह से यह तकरीबन बंद है। इससे भारत समेत पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट पैदा होता दिख रहा है। भारत दूसरे मार्गों से तेल व गैस लेने की कोशिश कर रहा है। अभी गैर होर्मुज मार्ग से 70 प्रतिशत तेल भारत लाया जा रहा है।


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