रेनफेड एरिया डेवलपमेंट योजना: कैमूर के 700 किसानों का चयन, उत्पादन बढ़ाने में मिलेगी सरकारी मदद

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कैमूर में रेनफेड एरिया डेवलपमेंट योजना के तहत 700 किसानों का चयन किया गया है. इस योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादन को बढ़ाना है, जिसके लिए 2 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे. यह योजना कैमूर के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होने की संभावना है और कृषि क्षेत्र में विकास को बढ़ावा मिलेगा.

HighLights

  1. कैमूर के 700 किसानों का रेनफेड योजना में चयन
  2. उत्पादन बढ़ाने के लिए 2 करोड़ से ज्यादा खर्च
  3. किसानों की आय में वृद्धि की संभावना

 रेनफेड एरिया डेवलपमेंट योजना के तहत कैमूर जिले के सात सौ किसानों का चयन किया गया है। इस योजना का उद्देश्य वर्षा आधारित खेती वाले क्षेत्रों में कृषि व्यवस्था को मजबूत करना और किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है।

योजना के अंतर्गत खेती सुधार, जल संरक्षण, मिट्टी प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा। इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी विकास कुमार ने बताया कि रेनफेड एरिया डेवलपमेंट योजना विशेष रूप से उन इलाकों के लिए तैयार की गई है, जहां खेती मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर रहती है।

ऐसे क्षेत्रों में सूखा, सिंचाई की कमी और कम उत्पादन जैसी समस्याएं आम हैं। इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस योजना को लागू किया है। जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि योजना को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए कृषि विभाग द्वारा विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है।

इसके तहत खेती सुधार, फसल उत्पादन बढ़ाने, जल संरक्षण और किसानों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि किसान कम लागत में अधिक उत्पादन कर सकें।

कैमूर में 2.13 करोड़ रुपये होंगे खर्च

कैमूर जिले में इस योजना पर लगभग 2.13 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके तहत जिले में 14 क्लस्टर बनाए जाएंगे। प्रत्येक क्लस्टर में 50 एकड़ भूमि का चयन किया गया है और प्रति क्लस्टर 50 किसानों को शामिल किया जाएगा। किसानों को समेकित कृषि प्रणाली के तहत प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

280 हेक्टेयर भूमि में होगी खेती

रेनफेड एरिया डेवलपमेंट योजना के अंतर्गत कैमूर जिले में कुल 280 हेक्टेयर भूमि में खेती की जाएगी। अधौरा सहित चैनपुर और भगवानपुर प्रखंड के उन पंचायतों को क्लस्टर में शामिल किया जाएगा, जहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध नहीं है और किसान पूरी तरह वर्षा पर निर्भर हैं।

जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए विभागीय निर्देशों के आलोक में सभी आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इस योजना से किसानों के लिए बेहतर खेती प्रणाली विकसित होगी और आधुनिक कृषि तकनीकों का सीधा लाभ मिलेगा।


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